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Claim of major political breakdown in TMC
नई दिल्ली : कोलकाता से बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहां पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहरा संकट खुलकर सामने आता दिख रहा है। विधानसभा के बाद अब यह विवाद संसद तक पहुंच गया है, जिससे देश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
20 टीएमसी सांसदों के एनडीए समर्थन का दावा, सियासी भूचाल
सूत्रों और रिपोर्ट के अनुसार टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर एनडीए को समर्थन देने की बात कही है। लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं, ऐसे में इस कथित बगावत को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।कहा जा रहा है कि सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में यह समूह सामने आया है, जिसने राजनीतिक समीकरण बदलने का दावा किया है।
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर बैठक का दावा
रिपोर्ट के अनुसार बागी सांसदों की एक बैठक दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर भी हुई। इस बैठक में कई सांसदों की मौजूदगी बताई गई है, जहां एनडीए समर्थन की रणनीति पर चर्चा हुई।इन सांसदों का दावा है कि उनके साथ दो तिहाई से अधिक सांसद खड़े हैं।
टीएमसी का पलटवार: पत्र और दस्तावेज जारी
वहीं टीएमसी ने इन दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि यह पूरी स्थिति भ्रामक है। पार्टी ने 20 मई और 29 मई के पत्रों का हवाला देते हुए लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं।पार्टी का कहना है कि दल बदल कानून के तहत अलग गुट का दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
संसद में बदल सकता है संख्याबल, नए समीकरण का दावा
अगर इन दावों को सही माना जाए तो लोकसभा में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार
भाजपा के 240 सांसद
एनडीए के साथ मिलकर संख्या 293 से बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है
टीएमसी के 20 सांसदों के जुड़ने से नया संतुलन बन सकता है इधर इंडिया गठबंधन की संख्या 234 से घटकर 214 बताई जा रही है।
विधानसभा के बाद संसद तक पहुंचा अंदरूनी संकट
यह पूरा घटनाक्रम उस समय और तेज हो गया है जब हाल ही में बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद भी टीएमसी में असंतोष की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि कई विधायकों ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ रुख अपनाया था।अब यह विवाद संसद तक पहुंचने से टीएमसी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की तस्वीर और स्पष्ट होती दिख रही है।
बढ़ती सियासी हलचल पर नजर
फिलहाल यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है और सभी दलों की नजरें आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में इस दावे की सच्चाई और राजनीतिक असर और स्पष्ट हो सकता है।