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Historic moment of Zojila Tunnel: Country's longest tunnel 'R-Par' in the Himalayas, new strength of Ladakh connectivity
जम्मू-कश्मीर। लद्दाख की दुर्गम हिमालयी चोटियों के बीच बन रही जोजिला सुरंग अब अपने सबसे ऐतिहासिक चरण पर पहुंच गई है। लेह-श्रीनगर हाईवे पर 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह देश की सबसे लंबी और चुनौतीपूर्ण सुरंग मंगलवार को ‘आर-पार’ हो गई, जिससे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।
13.153 किलोमीटर लंबी यह सुरंग न सिर्फ देश की सबसे लंबी सुरंग है, बल्कि इसे दुनिया की सबसे कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में से एक में तैयार किया जा रहा है।यह परियोजना लद्दाख को सालभर देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कई महीनों तक सड़क संपर्क टूट जाता है।
कश्मीर के बालटाल और लद्दाख के द्रास क्षेत्र से चल रही खुदाई अब पूरी हो चुकी है। दोनों तरफ से काम कर रहे इंजीनियर और श्रमिक सुरंग के भीतर मिलकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने की तैयारी में हैं।सूचना के अनुसार, सुरंग के दोनों छोरों को जोड़ने के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
इस परियोजना की आधारशिला वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी। इसका लक्ष्य फरवरी 2028 तक पूरा करना तय किया गया है, लेकिन निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण चरण पार कर चुका है।केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और इसे भारत के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है।
जोजिला सुरंग को एशिया की सबसे लंबी सिंगल ट्यूब द्विदिशीय (बाई-डायरेक्शन) टनल माना जा रहा है। इसके बनने के बाद एक ही सुरंग से दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही संभव होगी, जिससे यात्रा समय और जोखिम दोनों में बड़ी कमी आएगी।
यह सुरंग लद्दाख के लिए सालभर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। अब तक सर्दियों में लगभग 5 से 6 महीने तक क्षेत्र का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क कट जाता था, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने के बाद हालात पूरी तरह बदल जाएंगे।
सोनमर्ग के पास बनी जेड-मोड़ टनल पहले ही चालू हो चुकी है, और अब जोजिला टनल इस क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने वाली सबसे बड़ी परियोजना साबित होगी।
जोजिला सुरंग सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में मानव क्षमता और तकनीकी कौशल की एक बड़ी मिसाल बनकर उभर रही है।