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Nomination of Congress Rajya Sabha candidate from Madhya Pradesh Meenakshi Natarajan canceled
भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच (स्क्रूटनी) के दौरान रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला लगभग समाप्त हो गया है और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है।
नामांकन रद्द होने के पीछे भाजपा द्वारा लगाए गए उस आरोप को आधार बनाया गया है, जिसमें कहा गया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई है।
भाजपा ने दर्ज कराई थी आपत्ति
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के खिलाफ औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र में लंबित न्यायिक मामले का उल्लेख नहीं किया, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है।
रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति पर सुनवाई करते हुए मीनाक्षी नटराजन को अपना पक्ष रखने के लिए मंगलवार शाम 6 बजे तक का समय दिया था। हालांकि उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण से संतुष्ट न होने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को खारिज कर दिया।
तीसरी सीट पर भाजपा की स्थिति मजबूत
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं। हालांकि कांग्रेस के दो विधायक—राजेंद्र भारती और मुकेश मल्होत्रा—राज्यसभा चुनाव में मतदान के पात्र नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस की प्रभावी संख्या 61 रह जाती है।
संख्या बल के आधार पर भाजपा पहले से ही दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में थी। उसके पास अतिरिक्त वोट भी मौजूद थे, लेकिन तीसरी सीट के लिए राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण माने जा रहे थे। अब कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट भी भाजपा के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस ने आरोपों को बताया निराधार
कांग्रेस ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले और लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई विधिवत आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
कांग्रेस का कहना है कि उन्हें केवल अदालत की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ था। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उम्मीदवारों को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है जो विधिवत दर्ज हों। किसी शिकायत या न्यायिक नोटिस का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं है। इसलिए जानकारी छिपाने का आरोप तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है।
क्या है पूरा मामला?
अदालती दस्तावेजों के अनुसार यह विवाद वर्ष 2025 में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। 20 अगस्त 2025 को ए. श्रीलता नामक महिला ने हैदराबाद की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में मीनाक्षी नटराजन समेत अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत आरोप लगाए गए थे। अदालत ने 17 सितंबर 2025 को मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया था।
इसके बाद 24 अक्टूबर 2025 को उनके वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताते हुए मामला खारिज करने की मांग की गई। हालांकि 17 नवंबर 2025 को अदालत ने मामला खारिज करने के बजाय सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया।
एफिडेविट में नहीं दी थी जानकारी
नामांकन जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में इस लंबित मामले का उल्लेख नहीं किया था। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया।
अब राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की तीसरी सीट पर मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई है और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह घटनाक्रम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

