

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

london bar bench badminton tournament row judges lawyers foreign travel criticism
नई दिल्ली। देश में महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लंदन में आयोजित न्यायाधीशों और वकीलों की बैडमिंटन चैंपियनशिप पर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी अबंतिका डेका की संस्था डेका इवेंट्स द्वारा आयोजित द्वितीय इंटरनेशनल बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप 7 जून को लंदन में संपन्न हुई। इस आयोजन को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा कुछ कॉर्पोरेट संस्थाओं का सहयोग प्राप्त था। बताया जा रहा है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भारत से लगभग 150 न्यायाधीश और अधिवक्ता ब्रिटेन पहुंचे थे।
विवाद की वजह यह है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए नागरिकों से अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने तथा मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी। ऐसे समय में सरकारी सहयोग से विदेश में आयोजित इस तरह के आयोजन को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई है।
गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष से भी कम समय में इस टूर्नामेंट के दो अंतरराष्ट्रीय संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं। पहला आयोजन थाईलैंड के पर्यटन स्थल फुकेत में हुआ था, जबकि दूसरा आयोजन अब लंदन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju और केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal की उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
आलोचकों का कहना है कि जब देश आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक संकटों का सामना कर रहा है, तब ऐसे विदेशी आयोजनों पर होने वाले खर्च की प्राथमिकता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, आयोजन से जुड़े पक्षों का तर्क है कि यह कार्यक्रम न्यायपालिका और विधि क्षेत्र के पेशेवरों के बीच संवाद, नेटवर्किंग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
फिलहाल इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है और कई लोग इससे जुड़े खर्च, प्रायोजन और सरकारी भागीदारी को लेकर पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।