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रायपुर। महज 21 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत से शुरू हुई एक जांच अब करीब 1800 करोड़ रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। मामले की जांच कर रहे 2022 बैच के IPS अधिकारी राहुल बंसल की जांच में आठ राज्यों से 23 आरोपियों की गिरफ्तारी, कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और बड़े पैमाने पर USDT ट्रांजैक्शन सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसी बीच जांच अधिकारी पर लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को एक अलग मोड़ दे दिया है।
21 लाख की शिकायत से शुरू हुई जांच
जानकारी के मुताबिक, IPS राहुल बंसल एक 21 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत की जांच कर रहे थे। शुरुआती जांच में मामला सीमित वित्तीय धोखाधड़ी का नजर आ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, फिनटेक माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की पड़ताल आगे बढ़ी, कथित तौर पर धोखाधड़ी का नेटवर्क बड़ा होता चला गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग राज्यों में फैले आरोपियों और कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क के तार सामने आने लगे। इसी क्रम में आठ राज्यों से 23 आरोपियों की गिरफ्तारी किए जाने का दावा है।
क्रिप्टो के जरिए रकम विदेश भेजने की आशंका
जांच में यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि कथित साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को हवाला नेटवर्क और फिनटेक कंपनियों की मदद से क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इसके बाद रकम को दुबई या अन्य स्थानों पर भेजे जाने की आशंका जांच के दायरे में आई।
बताया जा रहा है कि करीब चार महीने की अवधि में लगभग 1,880 करोड़ रुपये मूल्य के USDT ट्रांजैक्शन का पता चला है। यदि जांच में सामने आए इन लेनदेन का साइबर फ्रॉड से संबंध आधिकारिक तौर पर स्थापित होता है, तो यह मामला बेहद बड़े वित्तीय अपराध का रूप ले सकता है।
38 वेबसाइटों के सोर्स कोड बरामद होने का दावा
जांच की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस को कथित तौर पर 38 ट्रेंडिंग वेबसाइटों के सोर्स कोड भी मिले हैं। इन प्लेटफॉर्म से जुड़े डिजिटल डेटा और लेनदेन की जांच की जा रही है।
दावा है कि इन 38 वेबसाइटों में से फिलहाल केवल दो प्लेटफॉर्म की जांच में ही 1800 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फ्रॉड से जुड़े लेनदेन सामने आए हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने अब बाकी 36 वेबसाइटों की भी पड़ताल की बड़ी चुनौती है।
अगर इन सभी प्लेटफॉर्म का संबंध एक ही नेटवर्क से स्थापित होता है, तो धोखाधड़ी की वास्तविक रकम मौजूदा आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही संभव होगी।
मुख्य आरोपी के परिजन की गिरफ्तारी के बाद नया विवाद
मामले में मुख्य आरोपी के भाई की गिरफ्तारी के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया। आरोप है कि आरोपियों के रिश्तेदारों में शामिल एक व्यक्ति ने जांच कर रहे IPS अधिकारी राहुल बंसल पर ही गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए।
इसके बाद सोशल मीडिया पर मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। आरोप लगाने वालों की ओर से जांच अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए, जबकि दूसरी ओर यह दावा किया जा रहा है कि ये आरोप उस समय सामने आए जब जांच कथित तौर पर बड़े वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच चुकी थी।
क्या जांच को प्रभावित करने की कोशिश?
यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या जांच अधिकारी पर लगाए गए आरोप महज संयोग हैं या जांच को प्रभावित करने की रणनीति?
हालांकि इस सवाल का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों को तब तक तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक उनकी स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया में पुष्टि न हो जाए।
लेकिन जांच के घटनाक्रम को देखा जाए तो एक तरफ पुलिस कथित तौर पर 38 वेबसाइटों के सोर्स कोड और हजारों करोड़ रुपये के संभावित डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जांच अधिकारी खुद आरोपों के घेरे में आ गए हैं।
सोशल मीडिया ट्रायल पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर चलने वाली अधूरी जानकारी और आरोपों के आधार पर बनने वाली धारणाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।
किसी भी बड़े साइबर फ्रॉड मामले में जांच कई स्तरों पर होती है। बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, फिनटेक कंपनियों, क्रिप्टो एक्सचेंज, IP एड्रेस, सर्वर, वेबसाइट के सोर्स कोड और पैसों के ट्रेल की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
ऐसे में केवल किसी आरोपी या उसके परिजन के आरोप के आधार पर जांच अधिकारी को दोषी मान लेना जांच की निष्पक्षता और तथ्यों की जगह सोशल मीडिया नैरेटिव को महत्व देना हो सकता है।
अभी जांच के कई पहलू बाकी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित तौर पर मिले 38 वेबसाइटों के डिजिटल साक्ष्यों में से अभी केवल दो प्लेटफॉर्म की जांच पूरी तरह सामने आने का दावा किया जा रहा है। बाकी 36 वेबसाइटों की जांच से इस नेटवर्क के और बड़े होने या अलग-अलग नेटवर्क से जुड़े होने की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
साथ ही 1,880 करोड़ रुपये मूल्य के बताए जा रहे USDT ट्रांजैक्शन का स्रोत, वास्तविक लाभार्थी, ट्रांजैक्शन की प्रकृति और कथित साइबर फ्रॉड से उसका सीधा संबंध भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
21 लाख से 1800 करोड़ तक पहुंची कहानी
पूरे घटनाक्रम को एक लाइन में समझें तो मामला 21 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत से शुरू हुआ और जांच के दौरान करीब 1800 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड और क्रिप्टो लेनदेन तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क का वास्तविक आकार कितना सामने आता है और जांच अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है।
फिलहाल उपलब्ध दावों के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह मामला केवल 21 लाख रुपये की धोखाधड़ी तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। यदि जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन एक ही संगठित नेटवर्क से जुड़े साबित होते हैं, तो यह देश के बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल हो सकता है।
हालांकि, 1800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, USDT ट्रांजैक्शन और जांच अधिकारी पर लगाए गए आरोपों से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जानी चाहिए।