

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Badminton's biggest showdown kicks off in Delhi today; 382 players to vie for glory; India has a chance to make history.
नई दिल्ली। बैडमिंटन की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैम्पियनशिप सोमवार से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में शुरू होने जा रहा है। प्रतियोगिता का यह 30वां संस्करण है और 49 साल पुरानी इस चैम्पियनशिप की भारत में मेजबानी दूसरी बार हो रही है। इससे पहले 2009 में हैदराबाद ने इस बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी की थी।इस बार 54 देशों के कुल 382 खिलाड़ी पांचों कैटेगरी में चुनौती पेश करेंगे। चीन 30 खिलाड़ियों के साथ सबसे बड़ा दल लेकर पहुंचा है, जबकि भारत के 18 खिलाड़ी टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। कुल 33 खिलाड़ी एक से अधिक कैटेगरी में मैदान पर उतरेंगे।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बैडमिंटन में लगातार अपनी स्थिति मजबूत की है। 2011 से अब तक वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लगातार 11 संस्करणों में भारतीय खिलाड़ियों ने कम से कम एक पदक जीता है। भारत के नाम अब तक इस प्रतियोगिता में एक स्वर्ण, चार रजत और 10 कांस्य पदक हैं।दिलचस्प बात यह है कि भारत की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सफलता का सिलसिला 2009 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप की मेजबानी मिलने के बाद तेजी से आगे बढ़ा। उससे पहले इस प्रतियोगिता में भारत का एकमात्र पदक 1983 में प्रकाश पादुकोण ने कांस्य के रूप में जीता था।
वर्ल्ड चैम्पियनशिप के इतिहास में अब तक सिर्फ 22 देश पदक जीत सके हैं। इनमें 11 देश एशिया, आठ यूरोप, दो उत्तरी अमेरिका और एक ओशिनिया से हैं। अफ्रीका ऐसा एकमात्र महाद्वीप है, जिसके किसी देश ने अभी तक इस प्रतियोगिता में पदक नहीं जीता है।2025 में कनाडा पदक जीतने वाला सबसे नया देश बना था। उसी संस्करण में 10 अलग-अलग देशों ने कम से कम एक पदक अपने नाम किया था।
भारतीय दल की सबसे बड़ी उम्मीदों में पीवी सिंधु का नाम सबसे ऊपर है। वह पहले ही वर्ल्ड चैम्पियनशिप में पांच पदक जीत चुकी हैं और महिला सिंगल्स में सर्वाधिक पदक जीतने वाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। इस बार 31 साल की उम्र में उनके पास अपना छठा पदक जीतने का मौका है।भारत ने बैडमिंटन के तीन वर्गों में वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी भी तैयार किए हैं। इसके अलावा सिंधु वर्ल्ड चैम्पियन रह चुकी हैं। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने भी विश्व स्तर पर भारत को बड़ी पहचान दिलाई है।
सात दिवसीय टूर्नामेंट के पहले दिन भारतीय खिलाड़ी पांच मुकाबलों में चुनौती पेश करेंगे। पुरुष डबल्स में हरिहरन-अर्जुन की जोड़ी आयरलैंड के स्कॉट गौडी और पॉल रेनॉल्ड्स से भिड़ेगी।महिला डबल्स में प्रिया जॉली-गोपीचंद गायत्री की जोड़ी स्पेन की पाउला-लूसिया जोड़ी के सामने होगी। महिला सिंगल्स में पीवी सिंधु का सामना आयरलैंड की सोफिया नोबल से होगा।पुरुष सिंगल्स में आयुष शेट्टी चीन के शी यूकी के खिलाफ उतरेंगे। महिला डबल्स में काविप्रिया-सिमरन की जोड़ी स्पेन की कारमेन कैपरीला की जोड़ी से मुकाबला करेगी।
विश्व स्तरीय आयोजन के लिए इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के नवीनीकरण पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस बार खास तौर पर पक्षियों के कारण होने वाली परेशानी को दूर करने पर ध्यान दिया गया है।पिछले इंडिया ओपन के दौरान कबूतरों के कारण एक मुकाबला दो बार रोकना पड़ा था। इस समस्या से बचने के लिए टूटे पंखों और खुले रोशनदानों को ठीक किया गया है। स्टेडियम को इस तरह तैयार किया गया है कि पक्षियों के घोंसले बनाने की संभावना कम हो। इसके अलावा पक्षियों को दूर रखने के लिए विशेष जेल का भी इस्तेमाल किया गया है।
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव संजय मिश्रा के मुताबिक, इस बार आयोजन में लाइटिंग सहित पिछली प्रतियोगिताओं में सामने आई कई तकनीकी समस्याओं को दूर किया गया है। उनका कहना है कि इंडिया ओपन को एक तरह के टेस्टिंग इवेंट के रूप में देखा गया था, जबकि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए व्यवस्थाओं को और बेहतर किया गया है।इस आयोजन को भारत की खेल क्षमता और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को संभालने की क्षमता दिखाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि भारत देश के किसी भी हिस्से में विश्व स्तरीय खेल प्रतियोगिता आयोजित करने की क्षमता रखता है। साथ ही यह भविष्य में 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के भारत के दावे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण अनुभव साबित हो सकता है।