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Bidur Kant Jha, who once struggled with financial hardship, has now become a Director in the Ministry of Road Transport and Highways; Anand Kumar expressed pride.
पटना। कहते हैं कि अगर मेहनत करने का जज्बा हो और सही समय पर किसी का मार्गदर्शन मिल जाए, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकते। बिहार के पटना में ‘सुपर 30’ के संस्थापक आनंद कुमार ने अपने एक पूर्व छात्र बिदुर कांत झा की प्रेरणादायक कहानी साझा की है। कभी आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई जारी रखने में कठिनाइयों का सामना करने वाले बिदुर कांत झा आज भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। अपने छात्र की इस उपलब्धि पर आनंद कुमार ने गर्व जताया और शिक्षक-विद्यार्थी के रिश्ते की अहमियत को भी उजागर किया।
आनंद कुमार ने सोशल मीडिया पर बिदुर कांत झा से जुड़ा एक भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनके पूर्व छात्र का फोन आया, जिसने उन्हें करीब 30 साल पुरानी यादों में पहुंचा दिया। उस समय बिदुर की आंखों में बड़े सपने थे, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण उनके लिए पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। आनंद कुमार ने याद किया कि जब बिदुर उनके पास पहुंचे थे, तब उन्होंने उन्हें पैसों की चिंता छोड़कर मेहनत पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

आनंद कुमार ने अपने छात्र के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए लिखा, “आज मेरे पूर्व छात्र बिदुर कांत झा का फोन आया और 30 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। एक बार एक लड़का मेरी चौखट पर खड़ा था। उसकी आंखों में सपने थे, लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। मैंने उससे कहा था, ‘पैसों की चिंता मत करो, बस मेहनत करो।’” आनंद कुमार के ये शब्द उस भरोसे को दर्शाते हैं, जो उन्होंने मुश्किल दौर में अपने विद्यार्थी को दिया था। बिदुर ने भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहे।
बिदुर कांत झा का सफर इस बात की मिसाल है कि आर्थिक कठिनाइयां किसी व्यक्ति की प्रतिभा और महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए नहीं रोक सकतीं। सीमित संसाधनों के बीच अपने भविष्य को संवारने के लिए संघर्ष करने वाले बिदुर आज सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में डायरेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिश्रम को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सही दिशा में की गई मेहनत व्यक्ति को बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचा सकती है।
आनंद कुमार के लिए बिदुर की सफलता की सबसे खास बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी उन्होंने अपने पुराने शिक्षक को याद रखा। आनंद कुमार ने लिखा, “आज इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद उसने अपने पुराने शिक्षक को नहीं भुलाया है। यही एक शिक्षक का असली इनाम है! दो तस्वीरें, एक 30 साल पहले की और दूसरी आज की। वक्त बदल गया है, लेकिन रिश्ता आज भी वही है।”
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आनंद कुमार की इस पोस्ट में सफलता के साथ-साथ उस भावनात्मक जुड़ाव की झलक भी मिलती है, जो एक शिक्षक और उसके विद्यार्थी के बीच समय बीतने के बाद भी बना रह सकता है। किसी विद्यार्थी को आगे बढ़ते देखना और उसका वर्षों बाद भी अपने गुरु के प्रति सम्मान बनाए रखना किसी भी शिक्षक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
आनंद कुमार लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। उनके ‘सुपर 30’ कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे छात्रों को आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, जिनके पास आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बेहतर अवसर नहीं होते। उनके इसी प्रेरणादायक सफर पर बॉलीवुड फिल्म ‘सुपर 30’ भी बनाई गई थी, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन ने आनंद कुमार की भूमिका निभाई थी।
बिदुर कांत झा की कहानी केवल एक छात्र की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन की ताकत को भी सामने लाती है। एक समय पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की जरूरत रखने वाले विद्यार्थी का आज केंद्र सरकार के मंत्रालय में डायरेक्टर के पद तक पहुंचना दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। वहीं, आनंद कुमार और उनके पूर्व छात्र का रिश्ता यह संदेश देता है कि शिक्षक का योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता। सही समय पर मिला प्रोत्साहन किसी विद्यार्थी के जीवन की दिशा बदल सकता है और वर्षों बाद भी उसका प्रभाव कायम रह सकता है।