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Central Government should take measures for children's digital safety on social media: Supreme Court
बच्चों तक यौन और उम्र के मुताबिक कंटेंट पहुंचने, उन्हें ऑनलाइन बहला-फुसलाकर शोषण के जाल में फंसाने और साइबर बुलिइंग के खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने गुरुवार को कहा, कि भारत में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए 'फायरवॉल' जैसे उपाय जरूरी हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने आईटी और कानून मंत्रालयों से एक एनजीओ द्वारा दायर की गई याचिका पर जवाब मांगा है।
दरअसल, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस नामक एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है, कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, कंटेंट शेयरिंग और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट न बना सकें। अगर नाबालिग को इसकी पहुंच देनी हो, तो उसके माता-पिता की सहमति और ई-केवाईसी जरूरी किए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है, कि भारत में कानूनन 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति अनुबंध नहीं कर सकता। जबकि सोशल मीडिया पर कंपनियां बच्चों से अनुबंध करती हैं। याचिका में पहले हुए ऐसे सभी अनुबंधों को अमान्य करने और आगे ऐसे अनुबंध न होने देने की मांग की गई है।
इस संदर्भ में अगर ऑनलाइन फायरवॉल की बात करें तो इसके अंतर्गत सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं। एंट्री के लिए सिर्फ जन्मतिथि ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद उम्र जांच और पैरेंट की सहमति जरूरी होती है।
इसमें यौन कंटेंट न दिखे, अनजान वयस्कों से बात न हो, प्रफाइल निजी रखी जाती है।
बहलाने-फुसलाने, बुलिंग शोषण के संकेत होने पर तुरंत पहचान, इसकी रोकथाम और शिकायत का आसान रास्ता उपलब्ध कराया जाता है।
आपको बता दें, कि बच्चों की डिजिटल पहुंच पर कई देशों में ऐसे ही फायरवॉल उपयोग किए जा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के व्यक्ति के अकाउंट रोकने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की है। पैरेंट की मंजूरी पर भी छूट नहीं है। इसका उल्लंघन करने पर 400 करोड़ तक जुर्माने का प्रवधान है।
मलेशिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। प्लेटफॉर्म को उम्र की ई-केवाईसी कराना जरूरी है।
इंडोनेशिया में मार्च 2026 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट्स डिलिट होने शुरू हो चुके हैं। यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक, इस्टाग्राम, थ्रेड्स, एक्स और रोब्लॉक्स सभी इसके दायरे में हैं।
इसके अलावा यूएई में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट इस्तेमाल पर रोक है। उम्र की जांच डिजिटल पहचान या एआई आधारित बायोमेट्रिक तरीके के होती है।