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Charge sheet to be filed against 15 officers in the 2003 CGPSC recruitment scam case.
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, यानि सीजीपीएससी की वर्ष 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी अब आरोप पत्र पेश करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, चालान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे इस माह के अंत तक न्यायालय में पेश किया जा सकता है। हालांकि, चालान पेश करने से पहले सरकार की अनुमति आवश्यक है। भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लगभग 15 अधिकारियों के विरुद्ध चार्जशीट पेश करने के संकेत भी मिले हैं।
आपको बता दें, कि ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा की गई जांच में वर्ष 2003 में हुए राज्य सेवा परीक्षा में कई अभ्यर्थियों के गलत तरीके से चयन का मामला सामने आया था। यह परीक्षा तत्कालीन भाजपा सरकार में हुई थी। जांच के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को उचित मानते हुए नई चयन सूची तैयार करने की सिफारिश की थी। हालांकि, हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मामला साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां आदेश पर रोक लगा दी गई। इस बीच प्रकरण से जुड़े कई अधिकारियों को पदोन्नति भी मिल चुकी है, जिनमें से कुछ को भारतीय प्रशासनिक सेवा यानि आइएएस में भी प्रमोट किया गया है।
ऐसे में प्रस्तावित चालान को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईओडब्ल्यू-एसीबी अब जांच से जुड़े दस्तावेज और अभियोजन की अनुमति संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटी है।
इस मामले में की गई जांच में पाई गई गड़बड़ियों की बात करें, तो ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच और मूल डाटा की दोबारा गणना के लिए किए गए ड्राई रन में 17 अपात्र अभ्यर्थियों के चयन और 17 योग्य अभ्यर्थियों के चयन से बाहर होने की बात सामने आई थी। वहीं 56 अभ्यर्थियों के पद और मेरिट क्रम में बदलाव किया गया था। जांच के दौरान 52 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जबकि इतने ही पात्र अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिलने की बात भी सामने आई थी। अभ्यर्थियों की प्रोफाइल शीट में भी छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं।
एक अभ्यर्थी वर्षा डोंगरे के मामले में यह बात सामने आई है, कि 1290.41 अंक प्राप्त करने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ। उनकी प्रोफाइल शीट में आबकारी उप निरीक्षक पद के सामने की गई काट-छांट की फोरेंसिक जांच में उनकी लिखावट और स्याही नहीं मिलने का उल्लेख है। वहीं मानव विज्ञान विषय में समान 200 वास्तविक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के स्केल्ड अंकों में बड़ा अंतर मिला। एक को 170.01 तो दूसरे को 239.22 अंक दिए जाने का आरोप है। इससे स्केलिंग प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। इसके अलावा इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को मिलने वाले आरक्षण में भी अनियमितता के आरोप लगे। एक अनारक्षित युवक को एसटी कोटे में डालकर राज्य लेखा सेवा का पद देने का आरोप है।
आपको ये भी बता दें, कि राज्य बनने के बाद हुई पहली पीएससी परीक्षा में 147 पदों पर चयन हुआ था। चयन प्रक्रिया को लेकर तीन अभ्यर्थियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी, जिनमें कवर्धा की वर्षा डोंगरे, मुंगेली के चमन सिन्हा और राजनांदगांव के रविंद्र सिंह शामिल थे।