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Chhattisgarh Assembly: Political heat rises over tiger deaths in Indravati Tiger Reserve; Forest Minister cornered by Opposition's questions.
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी का मामला जोरदार ढंग से उठा। ध्यानाकर्षण के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार बाघों का शिकार हो रहा है और विभाग लापरवाही बरत रहा है। इस दौरान विधायक शेषराज हरवंश, विक्रम मंडावी और लखेश्वर बघेल ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि बाघों के शिकार मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल के जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक सिंडिकेट काम कर रहा है? महंत ने कहा कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की ओर से पहले ही अलर्ट जारी किया गया था, इसके बावजूद विभाग ने सतर्कता नहीं बरती। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई और प्रदेश में बाघों की तस्करी के दौरान कैमरे तक बंद होने की बातें सामने आई हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने या उसका नाम छिपाने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगाए गए सभी 126 कैमरे पूरी तरह कार्यरत हैं और वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के सवाल पर वन मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 की गणना के अनुसार इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई है। अब तक छह बाघों की खाल बरामद हुई है, हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से अभी प्रमाणित नहीं हुआ है कि सभी खालें इंद्रावती के बाघों की ही हैं। उन्होंने बताया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व के संरक्षण और प्रबंधन पर प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि बस्तर में नक्सली गतिविधियां कम होने के बाद वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। पांच महीने पहले तीन बाघों के शिकार और हाल ही में दो बाघों की खाल बरामद होने की घटनाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद वन्यजीवों की तस्करी नहीं रुक रही है।
वन मंत्री ने सदन को बताया कि 29 जून 2026 को मुखबिर से सूचना मिलने के बाद वन विभाग और एंटी-पोचिंग टीम ने कांकेर जिले के बांदे-पखाजूर मार्ग पर संयुक्त कार्रवाई की। इस दौरान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली निवासी बियेश्वर गेड़ाम और बाबूराव मडावी को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई।
पूछताछ में पता चला कि बियेश्वर गेड़ाम महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल (विशेष शाखा) में पुलिस सिपाही है, जबकि बाबूराव मडावी गोपनीय मुखबिर के रूप में कार्यरत था। दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया। महाराष्ट्र पुलिस ने सिपाही को निलंबित कर दिया है और मुखबिर को सेवा से हटा दिया गया है।
वन मंत्री ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नेतीवाड़ा गांव में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। भारी बारिश और दुर्गम जंगलों के बीच हुई कार्रवाई में शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 नाखून, चार कैनाइन दांत और इंद्रावती नदी किनारे छिपाकर रखी गई तीसरी बाघ की खाल बरामद की गई।
वन्यजीव अवशेषों के डीएनए और भौगोलिक परीक्षण के लिए नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद बाघों की उम्र और उनके मूल स्थान की पुष्टि होगी।
वन मंत्री ने बताया कि इस पूरे मामले में अब तक कुल 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, मैदानी स्तर पर लापरवाही बरतने के आरोप में परिक्षेत्र अधिकारी कमल सिंह कश्यप, उपवनक्षेत्रपाल नरहरी सिंह बघेल और वनरक्षक विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बाघ संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी का गठन किया है और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच बाघों के अवैध शिकार और तस्करी के पांच मामलों में छह बाघों की खाल जब्त की गई है तथा सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी है।