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Chief Minister Vishnu Dev Sai participated in Chitrotpala Ganga Maha Aarti in Shivrinarayan.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बुधवार को माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में महानदी के तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय के साथ विधि-विधान से महाआरती की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं कल्याण की कामना की। इस दौरान महानदी के तट पर दीपों की जगमगाहट, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को शिवरीनारायण महोत्सव और शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता शबरी की पावन भूमि पर महानदी के तट पर आयोजित इस महाआरती में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता प्रदेश की धार्मिक आस्था, परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
महानदी छत्तीसगढ़ की आस्था और सभ्यता की अविरल धारा
मुख्यमंत्री ने महानदी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महानदी केवल जल की धारा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की अविरल धारा है। सदियों से महानदी प्रदेश की धरती को सींचती रही है। यह कृषि और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ नदी के किनारे विकसित हुई सांस्कृतिक परंपराओं की भी आधारशिला रही है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह देशभर में गंगा मैया के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव है, उसी तरह छत्तीसगढ़ के लोगों के मन में महानदी के प्रति भी गहरी आस्था है। हालांकि, नदियों के प्रति श्रद्धा तभी सार्थक होगी, जब उनके संरक्षण, संवर्धन और स्वच्छता को भी सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की जरूरत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि जल है तो कल है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है और प्रकृति से प्राप्त जल भावी पीढ़ियों के लिए अनमोल धरोहर है। इसे सुरक्षित रखना हर नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि आज जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे। इसलिए जल बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक और परिवार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
मुख्यमंत्री ने वर्षा जल की एक-एक बूंद सहेजने की अपील करते हुए कहा कि गांवों और शहरों में घरों, सार्वजनिक परिसरों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वर्षा जल संचय की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। जब प्रत्येक परिवार जल बचाने को अपना संकल्प बनाएगा, तभी यह अभियान व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।
प्रधानमंत्री के अभियान से मिल रही जल संरक्षण को गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल संचय-जनभागीदारी अभियान के माध्यम से देशभर में जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ सहित विभिन्न अवसरों पर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को और व्यापक बनाने की जरूरत है। प्रदेश के प्रत्येक गांव, नगर और परिवार को जल संचय की मुहिम से जोड़कर इसे जन-जन का संकल्प बनाना होगा।
सोकपिट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग से बढ़ेगा भूजल स्तर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए कई अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इन प्रयासों को विस्तार देने की आवश्यकता है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे पांच प्रतिशत मॉडल सहित विभिन्न नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बारिश का पानी बहकर व्यर्थ जाने के बजाय जमीन के भीतर पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिक और स्थानीय स्तर पर प्रभावी उपाय अपनाने होंगे। सोकपिट का निर्माण, हैंडपंपों के आसपास भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और स्थानीय जल संरचनाओं का संरक्षण जैसे उपाय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों और शहरों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल संचय की व्यवस्था विकसित करने से भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
तालाबों और कुओं के संरक्षण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोत केवल पानी के साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी हैं। इनका संरक्षण और पुनर्जीवन बेहद जरूरी है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से नदियों, तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ रखने तथा उन्हें प्रदूषण से बचाने की अपील की। साथ ही कहा कि जल का अपव्यय रोकना और वर्षा जल का अधिकतम संचय करना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी सहित प्रदेश की सभी नदियां जीवनरेखा हैं। चित्रोत्पला गंगा महाआरती जैसे धार्मिक आयोजन हमारी परंपराओं को मजबूत करने के साथ प्रकृति और जल स्रोतों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
शिवरीनारायण की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के प्रयास
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिवरीनारायण की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी यह पावन नगरी छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की विशिष्ट पहचान को और मजबूत करना जरूरी है। इन स्थानों की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
तोखन साहू और ओपी चौधरी ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि महानदी के तट पर महाआरती का आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त बनाता है। नदियां हमारी जीवनरेखा हैं और उन्हें प्रदूषण से बचाकर स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं, जिले के प्रभारी एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि शिवरीनारायण की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। भगवान श्रीराम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी इस नगरी को देश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
महानदी के पावन तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर सांसद कमलेश जांगड़े, नारायण चंदेल, महंत रामसुंदर दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। महाआरती के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।