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Concerns grow over LPG supplies, with a second ship arriving but the crisis persists.
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति संकट को लेकर चिंता बनी हुई है। मंगलवार सुबह रसोई गैस से लदा एक और जहाज भारतीय तट पर पहुंचा, लेकिन इससे केवल सीमित राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में यह साफ किया गया कि हालात अभी स्थिर नहीं हैं। यदि अगले कुछ दिनों में और एलपीजी टैंकर भारतीय रिफाइनरियों तक नहीं पहुंचे, तो आने वाले समय में परेशानी बढ़ सकती है।
दूसरा जहाज पहुंचा, पर राहत अस्थायी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी आपूर्ति संकट की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि अभी किसी भी वितरक के यहां स्टॉक खत्म नहीं हुआ है। सरकार के मुताबिक, होर्मुज मार्ग से एलपीजी लेकर आया जहाज ‘नंदा देवी’ मंगलवार तड़के गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंचा। इससे पहले सोमवार शाम एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था। पिछले 24 घंटों में इन दोनों जहाजों से करीब 93 हजार टन एलपीजी की आवक हुई है, लेकिन यह देश की कुल मांग के मुकाबले काफी कम है।
खपत के मुकाबले आपूर्ति अब भी कम
फरवरी 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजाना करीब एक लाख टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें 85 प्रतिशत घरेलू उपयोग और बाकी वाणिज्यिक क्षेत्र में खपत होती है। मार्च 2026 में घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन 38 प्रतिशत बढ़कर करीब 52 हजार टन प्रतिदिन पहुंचा है, लेकिन यह कुल मांग का लगभग आधा ही पूरा कर सकता है। यही वजह है कि एलपीजी आपूर्ति संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। सरकार ने रिफाइनरियों से घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देने को कहा है।
होर्मुज पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसमें 90 प्रतिशत आयात होर्मुज मार्ग से आता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में तनाव का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। अमेरिका से एलपीजी खरीदी गई है, लेकिन उसे भारत पहुंचने में चार से पांच सप्ताह लग सकते हैं। वहीं रूस से खरीदी गई एलएनजी को एलपीजी में बदलने में भी समय लगेगा। कुल मिलाकर, एलपीजी आपूर्ति संकट पर फिलहाल अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान तभी संभव होगा जब होर्मुज मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाए।