

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Conclusion of Monsoon Session 2026: Lowest productivity in 22 years... Parliamentary proceedings ended amidst uproar.
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र इस बार बेहद कम उत्पादकता और लगातार गतिरोध के कारण चर्चा का विषय बन गया। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र निर्धारित 19 बैठकों के बावजूद अधिकांश समय बाधित रहा। अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही 'वंदे मातरम्' के गायन के बाद महज कुछ मिनट में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई, जबकि राज्यसभा भी सीमित समय तक ही चल सकी।
संसदीय कार्यवाही पर नजर रखने वाली संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, इस मानसून सत्र में लोकसभा की उत्पादकता करीब 15 प्रतिशत और राज्यसभा की लगभग 33 प्रतिशत रही। दोनों सदनों का औसत कामकाज लगभग 23 प्रतिशत के आसपास रहा, जो पिछले दो दशकों के सबसे कमजोर मानसून सत्रों में शामिल है।लोकसभा में कुल 12 विधेयक पेश किए गए। इनमें केवल दो विधेयकों पर चर्चा हो सकी, जबकि शेष अधिकांश विधेयक बिना विस्तृत बहस के पारित कर दिए गए।
सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में एक ऐतिहासिक क्षण भी देखने को मिला। पहली बार संसद में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरों का सामूहिक गायन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित सरकार और विपक्ष के वरिष्ठ नेता सदन में मौजूद रहे।गायन समाप्त होते ही विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने लगातार हंगामा कर सदन नहीं चलने दिया। उनका कहना था कि पूरे सत्र में लोकसभा में प्रश्नकाल भी प्रभावी ढंग से नहीं चल सका।वहीं भाजपा नेताओं ने संसद में हुए विरोध-प्रदर्शनों और नारेबाजी को संसदीय गरिमा के खिलाफ बताया। दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने और जवाबदेही से पीछे हटने का आरोप लगाया।
संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, यह सत्र हाल के वर्षों के सबसे कम उत्पादक सत्रों में शामिल हो गया है। इससे पहले वर्ष 2010 के शीतकालीन सत्र और 2013 के शीतकालीन सत्र में भी लगातार हंगामे के कारण कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस बार भी राजनीतिक टकराव के चलते विधायी कार्य सीमित रहा और अधिकांश समय गतिरोध में बीत गया।