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Gadkari’s stern message on highway construction quality... plans underway to overhaul the system, from tendering to DPR.
नई दिल्ली। एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी खामियों पर खुलकर चिंता जताई। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में अधिकारियों द्वारा तकनीकी और वित्तीय योग्यता तय किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्थायी और पारदर्शी नीति की जरूरत बताई।
फिक्की की ओर से आयोजित टनल एंड ब्रिज कॉन्फ्रेंस में गडकरी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में टेंडर की तकनीकी और वित्तीय पात्रता तय करने का अधिकार अधिकारियों के पास रहता है। उनके मुताबिक, इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर पात्रता की शर्तों को अपनी सुविधा के अनुसार बनाया जा सकता है।गडकरी ने इस प्रक्रिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसे योग्य और किसे अयोग्य बनाना है, यह तय करने के मामले में कुछ लोग बेहद माहिर हैं। उनके बयान को एनएचएआई की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों तथा निजी ठेकेदारों के बीच संभावित सांठगांठ को लेकर चिंता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने हाईवे परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई बार डीपीआर तैयार करने में पर्याप्त जमीनी अध्ययन नहीं किया जाता और केवल कंप्यूटर या गूगल आधारित जानकारी के सहारे रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है।गडकरी के मुताबिक, खराब डीपीआर का सीधा असर सड़क की डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने डीपीआर तैयार करने वाले कंसल्टेंट्स की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया।
गडकरी ने बताया कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें ठेकेदारों और डीपीआर कंसल्टेंट्स के काम का नियमित परफॉर्मेंस ऑडिट किया जाएगा।भविष्य में किसी कंपनी या कंसल्टेंट को नया टेंडर देने का फैसला उसके पिछले काम की रेटिंग के आधार पर किया जा सकता है। खराब प्रदर्शन करने वालों की जिम्मेदारी तय करने और उन्हें आगे के प्रोजेक्ट से दूर रखने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
गडकरी ने कहा कि टेंडर में तकनीकी और वित्तीय पात्रता निर्धारित करने के लिए स्पष्ट और स्थायी नियम होने चाहिए, ताकि हर परियोजना में मनमाने तरीके से शर्तें बदलने की गुंजाइश कम हो।उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नीति बनाने और उसे लागू करने वाली व्यवस्था के बीच कई बार जमीनी अनुभव का अभाव दिखाई देता है। उनके अनुसार, राजमार्ग क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए नीति निर्माण में वास्तविक परिस्थितियों और तकनीकी विशेषज्ञता को पर्याप्त महत्व देना जरूरी है।
गडकरी के बयान से स्पष्ट है कि सरकार हाईवे परियोजनाओं में केवल निर्माण की गति नहीं, बल्कि डिजाइन, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर भी अधिक जोर देने की तैयारी में है। ठेकेदारों और डीपीआर कंसल्टेंट्स की रेटिंग आधारित निगरानी लागू होने पर खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए जवाबदेही तय करने का रास्ता मजबूत हो सकता है।