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Hospital-like sensitivity is necessary in the judicial system: CJI
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI) ने कहा है कि न्याय व्यवस्था संवेदनशीलता के साथ काम करे, ठीक उसी तरह जैसे अस्पताल मरीजों के प्रति सेवा भाव रखते हैं। उनका मानना है कि जिस तरह कोई व्यक्ति इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल जाता है, उसी तरह लोग न्याय और राहत की उम्मीद लेकर अदालतों में आते हैं।
मंडी में कार्यक्रम के दौरान दिया संदेश
CJI सूर्यकांत ने यह बात हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक कार्यक्रम के दौरान कही। यहां 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक न्यायिक परिसर का शिलान्यास किया गया। इस मौके पर आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में उन्होंने न्याय प्रणाली को और अधिक मानवीय बनाने पर जोर दिया।
अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन जरूरी
अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने कहा कि आज के दौर में लोग अपने अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में मौलिक कर्तव्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने मौलिक अधिकार, और उनका पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
समाज के लिए संतुलित सोच की जरूरत
CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि केवल अधिकारों की मांग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और निभाएं।