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India won 8 medals on the ninth day of the Asian Games; Parul Chaudhary and Vithya Ramraj made history... Esha Singh won silver under pressure.
नागोया। एशियन गेम्स के नौवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की पदक तालिका में आठ और पदक जोड़ दिए। सोमवार को भारत को चार रजत और चार कांस्य पदक मिले। एथलेटिक्स से लेकर निशानेबाजी तक भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।दिन का सबसे खास प्रदर्शन वित्या रामराज का रहा। उन्होंने 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी ऊषा का करीब चार दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। वहीं पारुल चौधरी ने लगातार दूसरे दिन पदक जीतकर भारतीय महिला एथलेटिक्स में नया इतिहास बनाया। निशानेबाजी में ईशा सिंह ने बेहद रोमांचक मुकाबले के बाद रजत पदक अपने नाम किया।
400 मीटर हर्डल्स में वित्या रामराज ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। उनके प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने पीटी ऊषा का 40 साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।पीटी ऊषा ने 1984 के लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में 55.42 सेकंड का समय दर्ज किया था। वित्या ने इससे बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय महिला एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।
मेरठ की लंबी दूरी की धावक पारुल चौधरी ने 5000 मीटर दौड़ में 15:14.61 मिनट का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। इससे एक दिन पहले ही उन्होंने 3000 मीटर स्टीपलचेज में 9:08.67 मिनट के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया था।इस दौरान उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया। उनका पिछला रिकॉर्ड 9:12.46 मिनट था।पारुल अब लगातार दो एशियाई खेलों में दो दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला धावक बन गई हैं। इससे पहले हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीता था।
पारुल चौधरी का सफर आसान नहीं रहा। किसान परिवार में जन्मीं पारुल ने बचपन में बिना जूतों के दौड़कर अभ्यास किया। वह तड़के सुबह गांव की पगडंडियों पर दौड़ लगाती थीं।उनके पिता कृष्णपाल बताते हैं कि जब पारुल सुबह चार बजे दौड़ने निकलती थीं, तब गांव के कुछ लोग तरह तरह की बातें करते थे। बेटी के दौड़ने को लेकर परिवार को ताने भी सुनने पड़ते थे।आज वही पारुल अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार पदक जीतकर अपने प्रदर्शन से जवाब दे रही हैं। उनकी लगातार दो दिन की उपलब्धि के बाद मेरठ और आसपास के क्षेत्र के धावकों में भी उत्साह है।
महिला 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत की 21 वर्षीय निशानेबाज ईशा सिंह ने रजत पदक हासिल किया। फाइनल मुकाबला बेहद तनावपूर्ण रहा और ईशा को पदक की दौड़ में बने रहने के लिए कई शूट ऑफ से गुजरना पड़ा।निर्धारित सीरीज के बाद ईशा और चीन की शियाओ जियारुईशुआन के 38-38 अंक थे। निर्णायक निशाने में ईशा चूक गईं और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।ईशा ने इससे पहले वियतनाम की टी धू विन्ह के खिलाफ तीन शूट ऑफ जीतकर पदक की दौड़ में अपनी जगह कायम रखी थी। इसके बाद स्वर्ण पदक के लिए उन्हें चीन की निशानेबाज के खिलाफ दो और शूट ऑफ का सामना करना पड़ा।
ईशा सिंह ने बताया कि फाइनल से पहले वह काफी दबाव में थीं और उन्हें रात में ठीक से नींद भी नहीं आ रही थी। ऐसे समय में उनकी मां से फोन पर हुई बातचीत ने उन्हें मानसिक रूप से संभलने में मदद की।ईशा के मुताबिक उनकी मां ने सहानुभूति देने के बजाय उन्हें डांट लगाई और कहा कि वह मुकाबले का आनंद लें। मां ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका हर किसी को नहीं मिलता।ईशा ने बताया कि इस बातचीत के बाद उनका नजरिया बदल गया। फाइनल में भी कई बार बाहर होने की स्थिति के बावजूद उन्होंने मुकाबला नहीं छोड़ा और लगातार वापसी करती रहीं।
लगातार शूट ऑफ का असर ईशा के शरीर पर भी पड़ा। उनका शूटिंग वाला हाथ थकान और तनाव के कारण कड़ा महसूस होने लगा था। इसके बावजूद उन्होंने अपना संयम बनाए रखा।ईशा ने कहा कि मुकाबले के दौरान सबसे ज्यादा दबाव इस बात का था कि किसी भी समय प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ सकता है। शुरुआती दौर में बढ़त मिलने के बावजूद उनकी योजना के मुताबिक चीजें नहीं चल रही थीं। फिर भी उन्होंने अपना ध्यान बनाए रखा और आखिरी तक मुकाबला किया।ईशा के लिए यह एशियाई खेलों में एक और पदक है। इससे पहले हांगझोउ खेलों में भी उन्होंने 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत और टीम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
दो बार की ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। उन्होंने क्वालीफिकेशन में 579 अंक हासिल किए और 11वें स्थान पर रहीं।फाइनल के लिए जरूरी स्थान नहीं मिलने के कारण मनु इस एशियाई गेम्स में पदक जीतने से चूक गईं। इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भी उन्हें पदक नहीं मिला था।भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन चौथी सीरीज में राही सरनोबत का 39 अंक का स्कोर टीम की उम्मीदों पर भारी पड़ा। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं।
पुरुषों की लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ने 8.07 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक हासिल किया। पालक्कड के 27 वर्षीय श्रीशंकर ने दूसरे प्रयास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।यह उनके लिए एशियाई खेलों में लगातार दूसरा रजत पदक है। उन्होंने हांगझोउ एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता था। इस साल ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।
पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में गुलवीर ने रजत पदक जीता। इससे पहले वह 10 हजार मीटर दौड़ में भी रजत पदक अपने नाम कर चुके हैं।इस तरह एथलेटिक्स में भारत का पदक अभियान लगातार मजबूत बना हुआ है और लंबी दूरी की दौड़ में गुलवीर ने एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाई।
भारत को सोमवार को कुल आठ पदक मिले। इनमें चार रजत और चार कांस्य पदक शामिल रहे।लवीर सिंह: 1500 मीटर दौड़, रजत, मुरली श्रीशंकर: लंबी कूद, रजत,यशवीर सिंह: भाला फेंक, रजत,ईशा सिंह: 25 मीटर पिस्टल, रजत,पारुल चौधरी: 5000 मीटर दौड़, कांस्य,रोहित यादव: भाला फेंक, कांस्य,पिंकी बल्हारा: कुराश, कांस्य,वित्या रामराज: 400 मीटर हर्डल्स, कांस्य
नौवें दिन के प्रदर्शन के बाद भारत के खाते में कुल 45 पदक हो गए हैं। इनमें 4 स्वर्ण, 20 रजत और 21 कांस्य पदक शामिल हैं।पदक तालिका में चीन 132 स्वर्ण, 53 रजत और 45 कांस्य समेत 230 पदकों के साथ शीर्ष पर है। जापान के खाते में 41 स्वर्ण, 68 रजत और 63 कांस्य समेत 172 पदक हैं।भारत 4 स्वर्ण, 20 रजत और 21 कांस्य सहित कुल 45 पदकों के साथ तालिका में 12वें स्थान पर है।
नौवें दिन की सफलता के बाद भारतीय दल की नजर अगले मुकाबलों पर है। एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और अन्य स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद बनी हुई है। मुक्केबाजी में भारत के तीन पदक पहले ही सुनिश्चित हो चुके हैं, जबकि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है।