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Latest News: A major step towards women's reservation, preparing to create new history in the special session of Parliament
नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक अहम मोड़ आने वाला है। केंद्र सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की दिशा में संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस कानून के जरिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ होगा।
सरकार बनाम विपक्ष, श्रेय को लेकर बढ़ी सियासी तकरार
इस फैसले को लेकर सियासी माहौल भी गरमाया हुआ है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे की नीयत पर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़ साफ नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री ने महिलाओं से किया सीधा संवाद
नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन के दौरान देशभर की महिलाओं से खास अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने सांसदों से मिलकर अपनी अपेक्षाएं साझा करें और उन्हें आशीर्वाद देकर संसद सत्र के लिए रवाना करें। उनका मानना है कि जब जनप्रतिनिधि महिलाओं का समर्थन लेकर जाएंगे तो वे इस महत्वपूर्ण फैसले से पीछे नहीं हटेंगे।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
प्रधानमंत्री ने इस अधिनियम को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून न केवल बीते वर्षों के सपनों को साकार करेगा, बल्कि आने वाले समय के लिए मजबूत नींव भी रखेगा। संसद इस कदम के जरिए एक नया अध्याय लिखने जा रही है।
विज्ञान भवन में जुटीं देशभर की प्रमुख महिलाएं
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस सम्मेलन में कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। मंच पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, सावित्री ठाकुर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर मौजूद रहीं। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
छत्तीसगढ़ से समर्थन, सीएम साय ने बताया ऐतिहासिक अवसर
ने रायपुर में इस कार्यक्रम का प्रसारण देखा और इसे ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू होने से पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और लोकतंत्र को नई दिशा मिलेगी।
दशकों का इंतजार खत्म होने की ओर
महिला आरक्षण को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाला विशेष सत्र इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। अगर यह विधेयक पारित होता है, तो देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी।