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Latest News: Setback for CJP’s ‘Fix Schools’ campaign; Supreme Court refuses to lift the ban on entry into government schools.
नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और स्कूल परिसरों में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा लाइव स्ट्रीमिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लागू पूर्व-अनुमति की व्यवस्था फिलहाल बरकरार रहेगी।
यह मामला ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आए विवादों के बाद चर्चा में आया था। याचिका में राज्यों द्वारा सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर लगाई गई पाबंदियों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है।
याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों की ओर से जारी उन सर्कुलरों को चुनौती दी गई थी, जिनमें सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विभिन्न प्रकार की रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि सरकारी स्कूल सार्वजनिक संस्थान हैं और वहां की व्यवस्थाओं तथा कमियों को सामने लाने के लिए नागरिकों, पत्रकारों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को स्कूलों का दस्तावेजीकरण करने की अनुमति होनी चाहिए।
याचिका में दावा किया गया कि इस तरह के प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत प्राप्त अधिकारों को प्रभावित करते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, स्कूलों की स्वतंत्र रूप से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी होने से शौचालय, पेयजल, मिड-डे मील और बुनियादी ढांचे जैसी कमियों को सामने लाने में मदद मिल सकती है।
यह विवाद खास तौर पर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आए वीडियो और घटनाओं के बाद बढ़ा। आरोप लगाया गया कि कुछ यूट्यूबर्स और अन्य लोग बिना अनुमति सरकारी स्कूल परिसरों में दाखिल हुए और वहां शिक्षकों से सवाल-जवाब तथा रिकॉर्डिंग की गई। लखनऊ के एक स्कूल से जुड़ी घटना के बाद भी इस मुद्दे पर विवाद बढ़ा। इसके बाद सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री और रिकॉर्डिंग को लेकर राज्यों ने नियमों को सख्त किया।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जारी आदेशों के तहत सरकारी स्कूल परिसरों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई गई है।
राज्य सरकारों का तर्क रहा है कि स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने, विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों-कर्मचारियों को अनधिकृत गतिविधियों से बचाने के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन प्रतिबंधों को हटाने का आदेश नहीं दिया है। चूंकि कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, इसलिए उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सरकारी स्कूलों में प्रवेश एवं रिकॉर्डिंग के लिए लागू पूर्व-अनुमति की व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी।
इस फैसले के बाद सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए स्वतंत्र दस्तावेजीकरण की मांग तथा स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, निजता और अनुशासन के बीच संतुलन को लेकर बहस फिर तेज होने की संभावना है।