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Major crackdown on cyber fraud in Bhilai
भिलाई। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 120 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने, छिपाने और आगे अन्य खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। पुलिस ने सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित 'समन्वय पोर्टल' और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त इनपुट के आधार पर थाना भिलाई नगर क्षेत्र में संचालित पंजाब नेशनल बैंक के खातों की जांच की गई। जांच में कई ऐसे खाते सामने आए जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जा रहा था। ऐसे खातों को लेयर-1 या म्यूल अकाउंट के रूप में चिन्हित किया गया।
2024 से 2026 तक हुआ संदिग्ध लेन-देन
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच साइबर ठगी से प्राप्त रकम पहले इन खातों में जमा कराई गई और उसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर या नकद निकासी की गई। पुलिस का मानना है कि खातों का उपयोग अवैध आर्थिक लाभ कमाने और ठगी की रकम के स्रोत को छिपाने के लिए किया गया।
120 खाताधारकों पर दर्ज हुई एफआईआर
भिलाई नगर पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 388/2026 दर्ज किया है। पंजाब नेशनल बैंक के 120 खाताधारकों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब बैंक खातों की केवाईसी, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और खाताधारकों की भूमिका की जांच कर रही है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त रकम को अपने पास रखने के बजाय दूसरे लोगों के खातों में भेजने के लिए करते हैं। कई बार लोग कमीशन या लालच में अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं, जिससे वे अनजाने में भी साइबर अपराध का हिस्सा बन जाते हैं।
एसएसपी विजय अग्रवाल ने क्या कहा?
दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि समन्वय पोर्टल से ऐसे म्यूल अकाउंट की जानकारी प्राप्त हुई थी, जिनका उपयोग आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धन के लेन-देन में किया जा रहा था। इन खातों के बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और ट्रांजेक्शन की जांच के बाद जिन लोगों की अपराध में सहभागिता सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराध रोकने के लिए यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है। हाल ही में सराफा व्यापारियों के साथ बैठक कर उन्हें म्यूल अकाउंट और साइबर ठगी से बचाव के तरीकों की जानकारी भी दी गई थी।
3000 संदिग्ध खाते चिन्हित, 1500 पर हो चुकी FIR
एसएसपी ने बताया कि अब तक करीब 3000 लेयर-1 म्यूल अकाउंट चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 1500 खातों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और अब तक 165 आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। पुलिस लगातार बैंक खातों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस तरह की और कार्रवाई हो सकती है।
लोगों से पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर या थोड़े से लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। ऐसा करना आपको भी साइबर अपराध का आरोपी बना सकता है।
पुलिस ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आपके खाते का उपयोग पैसों के लेन-देन के लिए करने का प्रस्ताव देता है, तो उसे तुरंत अस्वीकार करें और इसकी सूचना पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें। साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।