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Major e-KYC fraud exposed: SIM cards were being routed to cyber fraudsters by misusing customers' biometric data.
रायपुर। पुलिस ने ई-केवाईसी प्रक्रिया में धोखाधड़ी कर फर्जी सिम कार्ड सक्रिय करने वाले दो पीओएस एजेंटों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी उमेश प्रजापति और खैरागढ़ निवासी मनोज देवांगन के रूप में हुई है। दोनों पर ग्राहकों के बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम जारी करने और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी एक अतिरिक्त सक्रिय सिम कार्ड को तीन हजार से पांच हजार रुपये तक में साइबर ठगों को बेचते थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, ब्लैकमेलिंग और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था।
जांच के दौरान दो प्रमुख साइबर ठगी के मामलों का खुलासा हुआ। एक मामले में गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति को फेसबुक पर दोस्ती के बाद अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर लाखों रुपये की ठगी की गई। दूसरे मामले में 'कौन बनेगा करोड़पति' में इनाम जीतने का झांसा देकर टैक्स जमा कराने के नाम पर पीड़ित से रकम वसूली गई। पुलिस का मानना है कि इन वारदातों में ऐसे ही फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि जब कोई ग्राहक नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने आता था, तब ई-केवाईसी के दौरान उसके डबल थंब स्कैन और आई ब्लिंक का इस्तेमाल कर उसकी जानकारी से एक अतिरिक्त सिम भी सक्रिय कर दिया जाता था। यदि ग्राहक आधार कार्ड की प्रति देता था, तो उसी के आधार पर दूसरी ई-केवाईसी पूरी कर अलग सिम निकाल लिया जाता था। बाद में यह सिम साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।
रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देशन में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' के तहत यह कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन राज्यों और साइबर अपराधों में हुआ।