

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Monsoon Rainfall Report Chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून का आधा सीजन बीत चुका है, लेकिन बारिश का वितरण अब भी असमान बना हुआ है। प्रदेश के कुछ जिलों में जमकर बारिश हुई है, जबकि कई इलाकों में बादल मेहरबान नहीं हुए हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, वहीं 14 जिलों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक हुई बारिश औसत रूप से सामान्य श्रेणी में है, लेकिन जिलेवार स्थिति काफी अलग है। कहीं बारिश सामान्य से 59 प्रतिशत तक अधिक हुई है तो कहीं 49 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। यही असमानता किसानों और कृषि गतिविधियों पर असर डाल रही है।
33 जिलों में अलग-अलग तस्वीर
प्रदेश के 33 जिलों में से करीब 15 जिलों में बारिश सामान्य रही है। वहीं 14 जिले ऐसे हैं जहां बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। केवल कुछ जिलों में ही अच्छी बारिश की स्थिति बनी हुई है।
बिलासपुर और रायगढ़ जैसे क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन उसी समय रायपुर और दुर्ग जैसे मैदानी इलाकों में बारिश की कमी देखने को मिली है। वहीं बस्तर में कई बार झमाझम बारिश होने के बावजूद सरगुजा क्षेत्र में बादल कम बरसे हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सबसे ज्यादा बारिश
प्रदेश में सबसे अच्छी बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से करीब 59 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। इसके बाद जांजगीर-चांपा में करीब 32 प्रतिशत, मुंगेली में 23 प्रतिशत और बलौदाबाजार में करीब 22 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इन जिलों में खरीफ फसलों की बोआई को फायदा मिला है और किसानों ने तेजी से कृषि कार्य पूरा किया है।
38 लाख हेक्टेयर में खरीफ बोआई पूरी
जुलाई में हुई तेज बारिश के कारण प्रदेश में कृषि कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है। अब तक करीब 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोआई पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत बताया जा रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार किसानों के पास बोआई पूरी करने के लिए अभी कुछ समय बाकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बारिश होने पर शेष लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा।
बारिश का सिस्टम तय करता है वितरण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की बारिश पूरे प्रदेश में एक समान नहीं होती। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र, मानसूनी द्रोणिका, ऊपरी हवा के चक्रवात और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां तय करती हैं कि किस क्षेत्र में कितनी बारिश होगी।
कई बार एक ही शहर के कुछ इलाकों में भारी बारिश होती है, जबकि कुछ किलोमीटर दूर दूसरे क्षेत्रों में कम बारिश होती है। इसका मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादल और मौसम प्रणालियां हैं।
अगले दो-तीन दिन बारिश के आसार
मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो कम बारिश वाले जिलों में स्थिति सुधर सकती है और खरीफ फसलों को भी राहत मिलेगी।
फिलहाल किसानों की नजरें मानसून के अगले दौर पर टिकी हुई हैं, क्योंकि अगस्त महीने की बारिश खरीफ उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।