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National News: A single complaint from Isha Ambani led to the birth of Reliance Jio
यह कहानी साल 2011 की है। येल यूनिवर्सिटी से छुट्टियों में घर लौटी ईशा अंबानी अपना कोर्सवर्क पूरा करने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन घर का इंटरनेट बार-बार अटक रहा था। मुकेश अंबानी ने बाद में सार्वजनिक रूप से उस घटना के बारे में बताया था कि बेटी ने शिकायत की थी, कि घर का इंटरनेट बिल्कुल अच्छा नहीं है। यह उस दौर की सामान्य समस्या थी। लाखों भारतीय परिवारों को यह तकलीफ अच्छी तरह समझ में आती है, लेकिन उसी एक शिकायत के बाद जो कुछ हुआ, उसने इंटरनेट की दुनिया को नया आकार दे दिया।
ईशा के भाई आकाश अंबानी ने इस समस्या को अलग नजरिए से देखा। उनके पिता की पीढ़ी के लिए टेलिकॉम का मतलब सिर्फ फोन पर बातें करना था। यहां बातें मिनट के आधार पर होती थीं और टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ भी इसी आधार पर लगाती थीं। हालांकि, उनकी पीढ़ी के लिए इंटरनेट पहले से ही हर चीज का केंद्र बन चुका था। पढ़ाई, मनोरंजन, शॉपिंग, बैंकिंग और रिश्तेदारों से जुड़े रहना, ये सब कुछ डाटा पर निर्भर था। आकाश का मानना था, कि भविष्य डाटा का है, वायस का नहीं। मुकेश अंबानी ने एक अन्य अवसर पर बताया था, कि ईशा और आकाश दोनों की बातों ने ब्रॉडबैंड और भारत के डिजिटल भविष्य के बारे में उनकी सोच को आकार दिया। एक शाम की साधारण बातचीत ने पीढ़ियों के बीच के बदलाव को साफ कर दिया।
आपको बता दें, कि रिलायंस समूह करीब दो दशक बाद अपनी किसी सब्सिडियरी कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानि आइपीओ लेकर आ रहा है।
ऐसे अंबानी परिवार के इतिहास को अगर देखें, तो हम पाएंगे कि हर पीढ़ी ने कुछ ऐसा देखा है, जो उनके पहले की पीढ़ी को नहीं मिला था। धीरूभाई अंबानी ने भारत के छोटे निवेशकों की संभावना पहचानी थी। मुकेश अंबानी ने देश की आकांक्षाओं के अनुरूप बड़े पैमाने पर निर्माण करने का अवसर देखा। सितंबर 2016 में जब जियो ने सेवाएं शुरू कीं, तो सस्ता मोबाइल डाटा देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचा। छात्र ऑनलाइन क्लासेस में शामिल होने लगे, छोटे दुकानदारों को फोन पर ग्राहक मिलने लगे। गुजरात के गांवों के परिवार मुंबई, दुबई या न्यूजर्सी में काम करने वाले बच्चों से वीडियो कॉल पर बात करने लगे। मनोरंजन, बैंकिंग और भुगतान की पूरी दुनिया में जैसे एक नई क्रांति आ गई। सब कुछ एक आम आदमी के हाथ में है। अब वह घर बैठे सब कुछ कर सकता था, वो भी सुरक्षित तरीके से।
इस नई संचार क्रांति का असर 2020 में आई कोरोना महामारी में भी देखा गया, जब सब कुछ ठहर गया, तो घर ही क्लासरूम, ऑफिस और क्लिनिक बन गए। जियो का नेटवर्क लाखों लोगों की लाइफलाइन बन गया। जियो ने अपने कम कीमत वाले जियोफोन यूजर्स को फ्री टॉकटाइम और अतिरिक्त डाटा दिया, ताकि सबसे कमजोर लोग भी इस मुश्किल समय में अलग न हों, वह जुड़े रहें। इसके साथ ही जियोमीट लॉन्च किया गया, ताकि देश के लोग ऑनलाइन मीटिंग्स कर सकें। परिवार की एक बातचीत से जन्मा यह कारोबार पूरे देश की आदतों को बदल गया। आकाश अंबानी अब रिलायंस समूह की भावी यात्रा के केंद्र में हैं।