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National honour for service to Abujhmad; Godbole couple receives historic recognition with Padma Shri
रायपुर। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में तीन दशकों तक लगातार निस्वार्थ स्वास्थ्य सेवा देने वाले डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में प्रदान किया गया, जिसने बस्तर और अबूझमाड़ की सेवा यात्रा को राष्ट्रीय पहचान दिला दी।यह केवल एक दंपती की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पूरे वनवासी अंचल के संघर्ष और पीड़ा की मान्यता है, जहां वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच गोडबोले दंपती ने सेवा को अपना जीवन बना लिया।
शादी के बाद सात दिन में बस्तर पहुंचे, फिर सेवा ही जीवन बन गई
महाराष्ट्र के सतारा जिले के मूल निवासी डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले और पुणे की सुनीता गोडबोले ने वर्ष 1990 में विवाह किया और महज सात दिन बाद ही बस्तर के बारसूर पहुंच गए।उस समय अबूझमाड़ और आसपास के क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से लगभग वंचित थे। माओवादी प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने यहां सेवा का रास्ता चुना और यहीं बस गए।
अबूझमाड़ की पगडंडियों में बसी जीवन यात्रा, लोग कहते हैं डॉक्टर भाई और दीदी
बारसूर पहुंचते ही डॉक्टर गोडबोले ने वनवासी कल्याण आश्रम के बंद पड़े क्लीनिक को फिर से शुरू किया। इसके बाद दोनों ने गांव गांव पैदल जाकर इलाज और स्वास्थ्य जागरूकता का काम शुरू किया।स्थानीय आदिवासी समाज उन्हें सम्मान और आत्मीयता से डॉक्टर भाई और दीदी कहकर पुकारता है। यह पहचान किसी पद या उपाधि से नहीं, बल्कि भरोसे और सेवा से बनी है।
एक लाख से अधिक मरीजों का इलाज, कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ लगातार अभियान
डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले अब तक एक लाख से अधिक लोगों का इलाज कर चुके हैं। दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और अबूझमाड़ के कई गांव आज भी उनकी सेवा के साक्षी हैं।उन्होंने केवल इलाज तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कुपोषण, एनीमिया, नशामुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे विषयों पर भी लगातार काम किया। ग्रामीण युवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर स्वास्थ्य सहयोगी तैयार करने का प्रयास भी किया गया।सुनीता गोडबोले ने शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया।
जर्मन चिकित्सक की किताब से जगी सेवा की प्रेरणा
डॉक्टर गोडबोले बताते हैं कि जर्मनी के समाजसेवी चिकित्सक अल्बर्ट श्वाइत्जर की किताब पढ़ने के बाद उनके भीतर वनवासी सेवा का संकल्प जागा। उसी प्रेरणा ने उन्हें बस्तर की कठिन परिस्थितियों में जीवन समर्पित करने की दिशा दी।
छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गोडबोले दंपती को पद्मश्री सम्मान मिलने पर बधाई देते हुए इसे राज्य के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में उनके द्वारा किया गया कार्य सेवा और समर्पण की अद्वितीय मिसाल है।वहीं उपमुख्यमंत्री ओपी चौधरी ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका जीवन मानव सेवा और करुणा की प्रेरक कहानी है।
सेवा की वह मिसाल, जिसने बस्तर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई
गोडबोले दंपती की यह यात्रा केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और समर्पण की ऐसी कहानी है जिसने अबूझमाड़ को देश के मानचित्र पर एक नई पहचान दी है।