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Path cleared for departmental TET for in-service teachers three times a year.
रायपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच छत्तीसगढ़ के सेवारत शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में शिक्षा मंत्री ने सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय टीईटी कराने पर सहमति जताई है। प्रस्ताव के अनुसार यह परीक्षा साल में तीन बार आयोजित की जा सकती है।विभागीय टीईटी सामान्य शिक्षक पात्रता परीक्षा से अलग होगी और इसका संचालन शिक्षा विभाग के स्तर पर किया जाएगा। अभी तक राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन व्यापम के माध्यम से होता रहा है।
बैठक में शिक्षकों ने सुझाव दिया कि विभागीय टीईटी के लिए सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 अंक निर्धारित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।साल में तीन बार परीक्षा आयोजित होने से सेवारत शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के लिए बार बार अवसर मिल सकेंगे। मध्यप्रदेश में भी इसी तरह साल में तीन बार टीईटी आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ में भी इसी मॉडल को अपनाने की दिशा में सहमति बनी है।
शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठन लगातार सक्रिय हैं। शिक्षकों को निर्धारित योग्यता पूरी करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है।इसी बीच सीबीएसई की ओर से 6 सितंबर को प्रस्तावित टीईटी परीक्षा को स्थगित किया गया है। परीक्षा के लिए नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने बैठक में टीईटी के अलावा सेवा संबंधी कई लंबित मांगें भी शिक्षा मंत्री के सामने रखीं। संगठन के अनुसार, पुराने नियमों के आधार पर वेटिंग लिस्ट से प्राचार्य पद पर पदोन्नति का रास्ता खोलने, ई संवर्ग के व्याख्याताओं की पदोन्नति और प्रधान पाठक पद पर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की व्यवस्था करने पर भी चर्चा हुई।शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर पुरानी पेंशन का लाभ देने तथा शिक्षक एलबी संवर्ग को सभी देय लाभ उपलब्ध कराने की मांग रखी। इसके साथ ही शिक्षक संवर्ग में मौजूद वेतन विसंगतियों को दूर करने का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया।
टीईटी से राहत की मांग को लेकर शिक्षकों ने 25 अगस्त को प्रदेश के सभी जिलों में टेट मुक्ति रैली निकाली थी। आंदोलन के कारण कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई थी।अब शिक्षा मंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने फिलहाल हड़ताल और विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। संगठन के प्रांतीय संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने कहा कि शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार बैठक में दिए गए आश्वासनों को जल्द लागू करेगी।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि उनकी पांच प्रमुख मांगों पर बैठक में विस्तार से चर्चा हुई है। उनके लिए सबसे अहम मुद्दा शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि सरकार यदि समयबद्ध तरीके से अपने आश्वासनों को लागू करती है तो विवाद का समाधान संभव है। हालांकि मांगों पर आगे की कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में शिक्षक संगठन दोबारा सरकार के समक्ष अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।