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Politics intensifies over special session: Mahant raises questions, government says opposition will be 'exposed'
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 30 अप्रैल को प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि राज्यपाल का पत्र मिलने के कारण विपक्ष सत्र में शामिल होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र में शासकीय कार्य का उल्लेख है, इसलिए विपक्ष चर्चा में भाग लेकर सरकार को जवाब देगा।
निंदा प्रस्ताव पर उठे सवाल, संवैधानिकता पर बहस
महंत ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि यह प्रस्ताव किसके खिलाफ लाया जाएगा और क्या लोकसभा की कार्यवाही पर विधानसभा में प्रस्ताव लाना संवैधानिक है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सदन में हुई चर्चा पर दूसरे सदन में बहस करना उनकी समझ से परे है।
सरकार का पलटवार- विपक्ष पर महिलाओं के अधिकार छीनने का आरोप
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने घोषणा की कि विशेष सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने “आधी आबादी के संवैधानिक अधिकार छीनने का काम किया” और कांग्रेस पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। साव ने कहा कि इस सत्र के जरिए विपक्षी नेताओं को “एक्सपोज” किया जाएगा।
महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बना मुख्य मुद्दा
विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून और डिलिमिटेशन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने का मुद्दा प्रमुख रहेगा। इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
सीएम साय बोले महिलाओं की उम्मीदों को ठेस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे “दुखी मन” से यह मुद्दा उठा रहे हैं। उनके अनुसार महिलाओं को 33% आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रुख के कारण अधूरा रह गया। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
एक दिवसीय सत्र में गरमागरम बहस के आसार
30 अप्रैल को होने वाला यह एक दिवसीय विशेष सत्र राज्य की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है।