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Supreme Court forgives man who used abusive language against CJI Surya Kant; declines to initiate contempt proceedings.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बीते शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम में हंगामा करते हुए केस से जुड़ी फाइल के कागज हवा में उछाल दिए और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे हिरासत में लेकर कोर्टरूम से बाहर कर दिया।
घटना उस समय हुई जब जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता बिना किसी वकील के स्वयं अपना पक्ष रख रहा था। सुनवाई के दौरान उसने कहा, "योर ऑनर, मैं आपको लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देता हूं।" इस पर बेंच ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, "क्या आप मुझे आदेश दे रहे हैं?"
बेंच के सवाल के बाद याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर केस फाइल हवा में उछाल दी और गाली-गलौज करने लगा। अदालत ने उसके इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की और संबंधित याचिका को खारिज कर दिया।
घटना के समय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कोर्टरूम में मौजूद नहीं थे। बाद में रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। इसके बावजूद CJI ने मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं करने का निर्देश दिया। उनका मानना था कि इस तरह की हरकतें अक्सर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से की जाती हैं और ऐसे मामलों में अनावश्यक प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के व्यवहार को न्यायालय की गरिमा के विपरीत बताते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हालांकि, उसकी परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं करने का निर्णय लिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।