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Supreme Court gets tough on private universities' earnings... full account of everything from fees to expenses must be submitted within six weeks.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों के वित्तीय और शैक्षणिक संचालन को लेकर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी विश्वविद्यालय शिक्षा के सार्वजनिक उद्देश्य को ध्यान में रखकर संचालित होने चाहिए और उन्हें मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में नहीं चलाया जा सकता। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छह सप्ताह के भीतर संबंधित विश्वविद्यालयों की ऑडिट रिपोर्ट और अन्य जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने विश्वविद्यालयों से छात्रों से ली गई फीस और उसके इस्तेमाल का विस्तृत ब्योरा मांगा है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि दाखिले और पूरे पाठ्यक्रम के दौरान किस मद में कितनी फीस ली गई, रकम कहां खर्च की गई और खर्च के बाद बची राशि का किस तरह इस्तेमाल हुआ।विश्वविद्यालय से सीधे तौर पर जुड़े नहीं लोगों को किए गए भुगतान का विवरण भी ऑडिट रिपोर्ट में शामिल करना होगा। सरकारों से मिले लाभ, जमीन आवंटन और कानूनी छूट जैसी सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केवल वित्तीय जानकारी तक मामला सीमित नहीं रखा है। विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया, प्रश्नपत्र तैयार करने और उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की व्यवस्था की जानकारी भी मांगी गई है।प्रबंधन की इन प्रक्रियाओं में क्या भूमिका है, यह भी बताया जाना है। शिक्षकों के लिए निर्धारित शिक्षण घंटे और वास्तव में ली गई कक्षाओं का विवरण देने का निर्देश है। यदि किसी वजह से कक्षाएं नहीं हो सकीं तो छात्रों के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी भी देनी होगी।
ऑडिट रिपोर्ट में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है। इसके अलावा नियामक संस्थाओं से विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों के निरीक्षण से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।संबंधित नियामकों को निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों और उनके सुधार की स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।
यह मामला अमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़ी एक छात्रा की याचिका से सामने आया था। छात्रा ने कॉलेज रिकॉर्ड में अपना नाम बदलने का अनुरोध किया था और इसके बाद उत्पीड़न की शिकायत की थी। मामले की जांच में सहयोग के लिए विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जांच से जुड़े अधिकारियों को भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने को कहा है।छात्रा की ओर से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और कथित मानहानिकारक पोस्ट प्रसारित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान ऐसे लिंक हटाने के लिए केंद्र को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि मांगी गई जानकारी पूरी तरह उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट इस प्रक्रिया के जरिए निजी विश्वविद्यालयों में फीस, वित्तीय प्रबंधन, भर्ती, शिक्षण व्यवस्था और नियामकीय अनुपालन से जुड़ी स्थिति की विस्तृत तस्वीर देखना चाहता है।