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Supreme Court issues contempt notice to Sanjay Raut and journalist Nikhil Wagle; next hearing on October 28
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों के मामले में शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को अवमानना नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने दोनों से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने मामले को 28 अक्टूबर को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही, अगली सुनवाई में दोनों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है।
सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय की दलीलें सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जब भी किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता या अधिकारों पर खतरा आया है, तब उनकी रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। न्यायपालिका ने ऐसे अधिकारों की सुरक्षा के लिए कभी पीछे हटने का प्रयास नहीं किया।पीठ ने यह भी कहा कि यदि वही लोग अदालत की निंदा करते हैं, उसकी आलोचना करते हैं या उस पर बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधान न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि संबंधित लोग अंततः समझदारी से काम लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने अदालत में कहा कि परिस्थितियों के कारण अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करनी पड़ रही है। उन्होंने दलील दी कि एक पक्ष जिम्मेदार सांसद है, जबकि दूसरा वरिष्ठ पत्रकार है। ऐसे लोगों की टिप्पणियों से दूसरे व्यक्ति भी प्रभावित होते हैं और संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।सुनवाई के दौरान मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका का समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अगली सुनवाई में अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी। फिलहाल नोटिस जारी होना अवमानना का दोष सिद्ध होना नहीं है; कार्यवाही शुरू करने और आगे की कार्रवाई को लेकर अदालत का निर्णय सुनवाई के दौरान होगा।