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Two key rulings by the Bilaspur High Court: Devendra Yadav's petition dismissed; interim stay on the promotion of constables.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए। एक ओर भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव की चुनाव याचिका से जुड़े आवेदन को खारिज करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्ट आचरण और जानकारी छुपाने जैसे गंभीर आरोपों का फैसला पूर्ण सुनवाई, गवाहों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा। वहीं, दूसरे मामले में पुलिस आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए अंतिम पदोन्नति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी गई।
हाई कोर्ट ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव की उस अर्जी को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका के कुछ बिंदुओं को "प्रारंभिक मुद्दा" मानते हुए बिना पूरी सुनवाई और साक्ष्य के मामले का जल्द निपटारा करने की मांग की थी।
अदालत ने कहा कि चुनाव में भ्रष्टाचार, चुनावी कदाचार और महत्वपूर्ण जानकारी छुपाने जैसे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों का निर्णय केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि गवाहों और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने वर्ष 2024 में चुनाव याचिका दायर कर देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र यादव ने नामांकन पत्र में अपने सोशल मीडिया (इंटरनेट मीडिया) अकाउंट्स, आय, संपत्ति तथा लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारियां छिपाईं, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनावी कदाचार और भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब तथ्यों को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो, तब मामले को प्रारंभिक मुद्दा मानकर तय नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए आवेदन खारिज कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 निर्धारित की है।
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया।
न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस विभाग विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक के पक्ष में अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
यह याचिका आरक्षक सुरेंद्र कुमार देशमुख ने दायर की है। याचिका में पुलिस मुख्यालय द्वारा दूसरे जिलों से स्थानांतरित आरक्षकों की वरिष्ठता तय करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि नियमों के अनुसार स्थानांतरित आरक्षकों को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाना चाहिए, लेकिन विभाग उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता तय कर रहा है, जिससे अन्य आरक्षकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक अंतिम पदोन्नति आदेश जारी करने पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।