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Union Labour Ministry team interacts directly with workers in Bhilai.
भिलाई। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल के विशेष प्रयासों से भिलाई के श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहली बार भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की केंद्रीय स्तर की उच्चस्तरीय टीम ने भिलाई पहुंचकर श्रमिकों और कर्मचारियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान नई चार श्रम संहिताओं, श्रमिकों के अधिकार, वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।

भिलाई इस्पात संयंत्र सहित सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं को देखते हुए आयोजित इस विशेष जागरूकता एवं श्रमिक संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम अधिकारियों के साथ CLC (C), ESIC, EPFO तथा छत्तीसगढ़ शासन के कारखाना निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।
केंद्रीय अधिकारियों ने श्रमिकों से किया सीधा संवाद
कार्यक्रम का नेतृत्व श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक (श्रम सुधार) डॉ. पी.के. जेना ने किया। केंद्रीय टीम में संजय कुमार तिवारी, अवर सचिव, Labour Reforms Cell और ओ.पी. सिंह, श्रम कल्याण आयुक्त (मुख्यालय), PMU-LRC शामिल रहे।
कार्यक्रम में श्रमिकों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को नई चार श्रम संहिताओं के प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही श्रमिकों को अपने सवाल और समस्याएं सीधे केंद्रीय अधिकारियों के सामने रखने का अवसर मिला।
सांसद विजय बघेल की पहल लाई रंग
दरअसल, भिलाई के श्रमिकों से जुड़े मुद्दों और नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन को लेकर सांसद विजय बघेल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र लिखा था। उन्होंने स्वयं मुलाकात कर भिलाई इस्पात संयंत्र सहित सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योगों में श्रम संहिताओं के प्रभाव, श्रमिकों के अधिकार, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सेवा शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था।
सांसद की पहल के बाद केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लिया और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम को भिलाई भेजा। इसी क्रम में 20 से 22 अगस्त तक केंद्रीय टीम भिलाई के दौरे पर है और 21 अगस्त को श्रमिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नियुक्ति पत्र से लेकर वेतन भुगतान तक की जानकारी
सांसद विजय बघेल ने कार्यक्रम के दौरान श्रमिकों के लिए नई श्रम व्यवस्था के संभावित लाभों को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों को नियुक्ति पत्र दिया जाना महत्वपूर्ण है। नियुक्ति पत्र में वेतन और अन्य सुविधाओं का उल्लेख रहेगा, जिससे श्रमिकों के अधिकार स्पष्ट होंगे।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों को सेवा से हटाने की स्थिति में भी निर्धारित प्रक्रिया और उचित कारण का पालन जरूरी होगा। ठेका श्रमिकों से जुड़े मामलों में भिलाई इस्पात संयंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि ठेका कार्य के लिए व्यवस्था संयंत्र की ओर से की जाती है।
मेडिकल सुविधा, कैंटीन और कार्यस्थल की व्यवस्थाओं पर भी जोर
विजय बघेल ने कहा कि श्रमिकों की कई चिंताएं कार्यस्थल की सुविधाओं से जुड़ी रही हैं। इनमें मेडिकल सुविधा, कैंटीन, टॉयलेट, रेस्ट रूम और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नई श्रम व्यवस्था में श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इनका प्रभावी पालन होने से श्रमिकों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सकता है।
समय पर वेतन और बैंक खाते में भुगतान पर जोर
कार्यक्रम में वेतन भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। विजय बघेल ने कहा कि श्रमिकों को समय पर वेतन मिलना बेहद जरूरी है। नई व्यवस्था के तहत वेतन भुगतान की समयसीमा तय किए जाने से श्रमिकों को वेतन में अनावश्यक देरी जैसी परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि वेतन का भुगतान श्रमिकों के खाते में किया जाएगा, जिससे भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा श्रमिकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसे प्रावधान भी उनके हित में महत्वपूर्ण हैं।
EPFO और ESIC से जुड़े अधिकारों की भी मिली जानकारी
कार्यक्रम में EPFO और ESIC से संबंधित सुविधाओं और अधिकारों पर भी चर्चा हुई। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।
नई श्रम संहिताओं के तहत वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध तथा व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को लेकर श्रमिकों के बीच लंबे समय से कई सवाल रहे हैं। केंद्रीय अधिकारियों की मौजूदगी में हुए संवाद से इन सवालों का समाधान करने का प्रयास किया गया।
श्रमिकों की शिकायतें केंद्रीय अधिकारियों तक पहुंचीं
कार्यक्रम की एक अहम विशेषता यह रही कि श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं एवं शिकायतों को केंद्रीय अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर मिला। सांसद कार्यालय को प्राप्त श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों की सूची भी केंद्रीय टीम के साथ साझा किए जाने की व्यवस्था की गई थी।
इससे भिलाई के श्रमिकों की समस्याओं को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय के स्तर तक पहुंचाने का रास्ता खुला है।
भिलाई के हजारों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण पहल
भिलाई इस्पात संयंत्र में लगभग 22 हजार से अधिक कर्मचारी एवं श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में केंद्रीय श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का भिलाई पहुंचकर श्रमिकों से प्रत्यक्ष संवाद करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम में श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं की प्रमाणिक जानकारी मिलने के साथ ही वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कार्यस्थल की सुविधाओं और सेवा शर्तों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर मिला।
विजय बघेल बोले- श्रमिकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा जरूरी
कार्यक्रम के दौरान सांसद विजय बघेल ने कहा कि समय, काल और परिस्थितियों के अनुसार कानूनों और व्यवस्थाओं में बदलाव होते हैं। भिलाई-दुर्ग क्षेत्र श्रमिक क्षेत्र है और यहां भिलाई इस्पात संयंत्र सहित कई बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में श्रमिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके हितों की रक्षा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से कर्मचारी संगठनों, अधिकारियों और श्रमिक प्रतिनिधियों को नई श्रम संहिताओं की जानकारी मिली है। इसका उद्देश्य यह है कि श्रमिक अपने अधिकारों को समझें और अपने तथा अपने परिवार की सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण के लिए इन प्रावधानों का लाभ उठा सकें।
केंद्र और श्रमिकों के बीच सीधे संवाद की नई शुरुआत
भिलाई में आयोजित यह श्रमिक संवाद कार्यक्रम नई श्रम संहिताओं को लेकर श्रमिकों के बीच मौजूद सवालों और भ्रम को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही केंद्रीय अधिकारियों की मौजूदगी में श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा होने से समाधान की प्रक्रिया को भी गति मिलने की उम्मीद है।
सांसद विजय बघेल की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने भिलाई के श्रमिकों को सीधे केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का मंच उपलब्ध कराया। इसे श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्थानीय स्तर से उठाकर केंद्र सरकार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।