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Chhattisgarh: Vedanta plant accident deepens, 24th death on sixth day raises concerns
सक्ति। सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे का असर लगातार सामने आ रहा है। घटना के छह दिन बाद एक और मजदूर की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 24 पहुंच गई है। झारखंड के मनीष कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ा, जिससे इस हादसे की गंभीरता और बढ़ गई है।
अस्पतालों में चल रहा इलाज, कई अब भी निगरानी में
हादसे में घायल मजदूरों का इलाज अलग अलग अस्पतालों में जारी है। कुल 10 घायल अभी उपचाराधीन हैं, जिनमें से 7 को डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। तीन मजदूरों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, जिनके जीवन को लेकर चिंता बनी हुई है।
कई कंपनियों के श्रमिक प्रभावित
घायल मजदूर अलग अलग कंपनियों से जुड़े हुए हैं। इनमें ठेका कंपनी एनजीएसएल के 5, गुएर एंड वेईल इंडिया लिमिटेड का 1 और डीसीपीएल का 1 कर्मचारी शामिल है। इनका इलाज जिंदल अस्पताल, बालाजी मेट्रो अस्पताल और रायपुर के श्री शंकरा अस्पताल में किया जा रहा है।
एक मजदूर स्वस्थ होकर लौटा घर
इस बीच राहत की खबर भी सामने आई है कि एक घायल मजदूर पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया है। हालांकि बाकी घायलों की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
चेयरमैन पर एफआईआर को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर उद्योगपति नवीन जिंदल और पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी ने सवाल उठाए हैं।
जांच के बाद तय हो जिम्मेदारी: जिंदल
नवीन जिंदल ने कहा कि इस मामले में पहले पूरी जांच होनी चाहिए और फिर सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि सरकारी संस्थानों में इस तरह की घटनाओं में सीधे शीर्ष पदों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, तो निजी क्षेत्र में भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
वेदांता को बताया राष्ट्रीय संपत्ति: बेदी
किरण बेदी ने अपने बयान में कहा कि वेदांता एक महत्वपूर्ण औद्योगिक संस्था है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर अहम माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी में लिए गए फैसले देश की औद्योगिक छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल, जांच से मिलेगी दिशा
पूरे घटनाक्रम ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे की असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।