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Vidisha Cyber Fraud: A retired electricity department employee couple in Vidisha fell victim to a 'digital arrest'; they were kept confined to their home for 25 days and swindled out of ₹69 lakh.
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बंटी नगर में साइबर ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग रिटायर्ड बिजलीकर्मी दंपत्ति को अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए दंपत्ति को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इस तरह उन्हें लगातार 25 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घर में कैद रखा और करीब 69 लाख रुपए की ठगी कर ली।
पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को CBI का अधिकारी बताते हुए उन्हें किसी बड़े आपराधिक मामले में शामिल होने की झूठी जानकारी दी। फर्जी अधिकारियों की वर्दी और धमकी भरे अंदाज से बुजुर्ग दंपत्ति इतने भयभीत हो गए कि ठगों के निर्देशों का पालन करने लगे।
ठगी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपियों ने दंपत्ति को लगातार 25 दिनों तक घर में ही डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान उन्हें किसी से मिलने, किसी को घटना की जानकारी देने या घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। ठग वीडियो कॉल के जरिए लगातार उन पर नजर रखते थे और किसी को जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते थे। इसी डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने अलग-अलग किस्तों में उनके बैंक खातों से कुल 69 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
जब बुजुर्ग दंपत्ति को ठगी का अहसास हुआ और वे आरोपियों के चंगुल से बाहर निकले, तो उन्होंने तुरंत सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इतनी बड़ी रकम की साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विदिशा के पुलिस अधीक्षक ने आरोपियों की तलाश के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया है। इनमें से एक टीम को राज्य के बाहर भी रवाना किया गया है। पुलिस को आशंका है कि इस ठगी के पीछे अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों का नेटवर्क हो सकता है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी में इस्तेमाल किए गए कई संदिग्ध बैंक खातों को होल्ड करवा दिया है, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके। साइबर सेल वीडियो कॉल, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि CBI, पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर आने वाले फर्जी कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहें। किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करने का अधिकार नहीं है। यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाता है, तो तुरंत कॉल काटें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।