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Why is seeing an owl on the night of Sharad Purnima considered auspicious?
नई दिल्ली। Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान माना जाता है। इस अवसर पर लोग खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
शरद पूर्णिमा को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से एक मान्यता रात में उल्लू दिखाई देने से भी जुड़ी है। धार्मिक विश्वासों में उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना गया है। यही वजह है कि इस विशेष रात उल्लू का दिखाई देना कुछ लोग शुभ संकेत मानते हैं।
शरद पूर्णिमा की रात उल्लू दिखना क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उल्लू मां लक्ष्मी का वाहन है और माता लक्ष्मी को धन, वैभव तथा समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी धार्मिक संबंध के कारण शरद पूर्णिमा की रात उल्लू दिखाई देने को मां लक्ष्मी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है।
लोकमान्यताओं में इसे जीवन में सुख-समृद्धि आने, आर्थिक स्थिति बेहतर होने और नए अवसर मिलने का संकेत भी माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं। उल्लू के दिखाई देने और भविष्य में धन लाभ होने के बीच किसी वैज्ञानिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लू बाईं ओर दिखाई दे तो क्या माना जाता है?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में रात के समय यात्रा करते हुए या किसी जरूरी काम के लिए जाते समय उल्लू का बाईं ओर दिखाई देना शुभ माना जाता है। इसी तरह उल्लू की आवाज सुनाई देने को भी कुछ लोकविश्वासों में कार्यों में सफलता मिलने का संकेत बताया गया है।
हालांकि, इन मान्यताओं का महत्व अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग हो सकता है। इन्हें धार्मिक आस्था और लोकविश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सफेद उल्लू को क्यों माना जाता है खास?
सफेद रंग के उल्लू को लेकर भी कई धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। इसे शुभता, सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सफेद उल्लू दिखाई देना जीवन में परेशानियां दूर होने और नए अवसर मिलने का संकेत हो सकता है।
हालांकि, सफेद दिखाई देने वाले उल्लुओं की दुर्लभता उनकी प्रजाति और रंग संबंधी विशेषताओं पर निर्भर करती है। केवल सफेद उल्लू दिखाई देने से भविष्य में कोई विशेष घटना होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
उल्लू का धन और भाग्य से क्या है संबंध?
मां लक्ष्मी के वाहन के रूप में उल्लू को धार्मिक परंपराओं में धन और वैभव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से कई लोग उल्लू के दर्शन को भाग्योदय और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। शरद पूर्णिमा के अवसर पर यह मान्यता और अधिक प्रचलित हो जाती है, क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे बताया गया है।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा का समय 25 अक्टूबर की रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर की रात 12:31 बजे तक बताया गया है। पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। इस कारण ब्रज में इस पर्व का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता: शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रमा के दर्शन और उल्लू से जुड़ी मान्यताएं भारतीय धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं। उल्लू दिखाई देने को शुभ मानना आस्था का विषय है, इसे निश्चित रूप से धन लाभ या भविष्य में होने वाली किसी घटना का संकेत नहीं माना जा सकता।