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कोंडागांव/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल में हुए दर्दनाक हादसे ने छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार, 13 अगस्त की शाम अचानक लैंडस्लाइड के बाद पानी और भारी मलबा घुस गया। हादसे के वक्त टनल के अंदर काम कर रहे कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए और सुरंग के भीतर फंस गए।
हादसे में कोंडागांव जिले के छह मजदूर भी प्रभावित हुए हैं। इनमें से दो मजदूरों की मौत हो गई है, दो घायल हैं, जबकि दो मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद से ही रेस्क्यू टीम लगातार मलबा हटाने और सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की तलाश में जुटी हुई है।
कोंडागांव के दो मजदूरों की मौत
हादसे में कोंडागांव जिले के लखेश्वर पोयाम (24), निवासी धनसूली और भुनेश्वर (25), निवासी मड़ानार की मौत की पुष्टि हुई है। दोनों मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में उत्तराखंड गए थे और निर्माणाधीन टनल में काम कर रहे थे।
दोनों की मौत की खबर गांव पहुंचते ही धनसूली और मड़ानार सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवारों में मातम पसरा हुआ है। परिजन अपनों को खोने के गम में हैं और गांव में भी लोग पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।
दो मजदूर अभी भी लापता
हादसे के बाद कोंडागांव के दो मजदूरों का अब तक पता नहीं चल सका है। इनमें देवनाथ (22), निवासी दहिकोंगा और चेतन पोयाम, निवासी धनसूली शामिल हैं।
दोनों के परिवारों को अब भी उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद है। परिजन लगातार प्रशासन और अधिकारियों से संपर्क कर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ले रहे हैं। सुरंग के भीतर पानी और मलबा होने के कारण बचाव दल को अभियान में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
दो मजदूर घायल, चमोली में इलाज जारी
हादसे में कोंडागांव जिले के सुनील (20), निवासी दहिकोंगा और पेनसिंह (33), निवासी सबलपुर घायल हुए हैं। दोनों का चमोली जिले में उपचार चल रहा है। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज पर भी नजर रखी जा रही है।
परिजनों की चिंता इस बात को लेकर भी बनी हुई है कि हादसे के बाद सुरंग के भीतर अभी कितने लोग फंसे हैं और रेस्क्यू टीम उन्हें किस तरह सुरक्षित बाहर निकाल पाएगी।
अचानक टनल में घुसा पानी और मलबा
जानकारी के मुताबिक गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में अचानक लैंडस्लाइड के बाद पानी का तेज बहाव और भारी मात्रा में मलबा अंदर घुस गया। कुछ ही समय में सुरंग का एक हिस्सा मलबे और पानी से भर गया। अंदर काम कर रहे मजदूरों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और कई श्रमिक सुरंग के भीतर फंस गए।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हुआ। राहत एवं बचाव कर्मियों ने सुरंग से मजदूरों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे में सात मौतों की पुष्टि
प्रशासन के मुताबिक हादसे में कुल 22 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में छत्तीसगढ़ के दो मजदूर शामिल हैं। वहीं कुछ मजदूरों की तलाश अभी भी जारी है।
रेस्क्यू टीम सुरंग से मलबा हटाने और पानी निकालने के साथ अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में प्रभावित लोगों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने लिया रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी घटनास्थल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली और सुरंग के अंदर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि टनल में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने छत्तीसगढ़ और झारखंड के मुख्यमंत्रियों से भी फोन पर बातचीत कर हादसे से प्रभावित श्रमिकों की स्थिति की जानकारी साझा की।
मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता
उत्तराखंड सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के उपचार और लापता मजदूरों की तलाश को प्राथमिकता दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में भी प्रशासन प्रभावित परिवारों के संपर्क में है और उत्तराखंड प्रशासन से लगातार जानकारी ली जा रही है।
गांवों में अपनों की वापसी का इंतजार
इस हादसे ने एक बार फिर उन मजदूर परिवारों की मुश्किलें सामने ला दी हैं, जो बेहतर रोजगार और रोजी-रोटी की तलाश में अपने गांव से हजारों किलोमीटर दूर जाते हैं। कोंडागांव के धनसूली, मड़ानार, दहिकोंगा और सबलपुर गांवों में इस समय चिंता और मातम का माहौल है।
जहां दो परिवार अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दो लापता मजदूरों के परिजन अभी भी उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनकी निगाहें लगातार रेस्क्यू टीम और प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं।
फिलहाल बचाव अभियान जारी है और रेस्क्यू टीम की प्राथमिकता सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचना तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। लापता मजदूरों के परिजनों को उम्मीद है कि राहत एवं बचाव दल जल्द ही उनके अपनों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब होगा।