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fake brigadier arrested in shahjahanpur after posing as indian army officer
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 21 वर्षीय एक युवक कथित तौर पर खुद को भारतीय सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पिछले दो महीनों से इलाके में घूम रहा था। सेना की वर्दी, ब्रिगेडियर जैसी पहचान, गाड़ी पर सेना मुख्यालय का झंडा और साथ में कथित सुरक्षा कर्मियों को देखकर लोग उसे सचमुच सेना का बड़ा अधिकारी समझ रहे थे। लेकिन शहीद संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उसकी सच्चाई सामने आ गई और वह पुलिस की हिरासत में पहुंच गया।
दो महीने से इलाके में घूम रहा था ‘ब्रिगेडियर’
जानकारी के मुताबिक, शाहजहांपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले करीब दो महीनों से एक युवक की चर्चा थी, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारी की तरह वर्दी पहनकर टाटा हैरियर वाहन में घूमता दिखाई देता था। उसकी गाड़ी पर सेना से जुड़े प्रतीक और झंडा लगे होने के कारण लोग उसकी पहचान पर सवाल नहीं उठाते थे।
हालांकि, उसकी गतिविधियों को लेकर कुछ पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों को संदेह हुआ। इसकी जानकारी धीरे-धीरे स्टेशन मुख्यालय शाहजहांपुर तक पहुंची। इसके बाद प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल जे.एस. जगलान और स्थानीय पूर्व सैनिकों ने मामले की पड़ताल शुरू की।
सम्मान समारोह के बहाने बुलाया गया शहीद संग्रहालय
सेना अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने बिना किसी विवाद के सच्चाई सामने लाने के लिए एक योजना बनाई। युवक को स्थानीय छात्रों को प्रेरित करने और सम्मानित करने के नाम पर शहीद संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।
बताया जाता है कि निमंत्रण मिलने के बाद युवक पूरे आत्मविश्वास के साथ कार्यक्रम में पहुंचा। जैसे ही उसकी टाटा हैरियर कार्यक्रम स्थल के बाहर रुकी, वहां मौजूद कई लोग उसके व्यक्तित्व और सुरक्षा व्यवस्था को देखकर प्रभावित हो गए। लेकिन कार्यक्रम स्थल पर पहले से मौजूद अधिकारियों और पूर्व सैनिकों की नजरें उसकी गतिविधियों पर टिकी हुई थीं।
जैसे ही उसकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ, पूरा मामला खुलने लगा। कुछ ही देर में युवक और उसके साथ मौजूद लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
तलाशी में मिले फर्जी पहचान पत्र और अन्य सामान
जांच के दौरान सामने आया कि आर्यन वर्मा ब्रिगेडियर रैंक की वर्दी पहने हुए था। वह जिस टाटा हैरियर में चल रहा था, उस पर वन-स्टार प्लेट और सेना मुख्यालय से संबंधित झंडा लगा हुआ था।
तलाशी में उसके पास से कथित फर्जी ब्रिगेडियर पहचान पत्र, एक एयर पिस्टल, एएमसी रेजिमेंटल केन और सेना से जुड़ी दिखने वाली अन्य सामग्री बरामद हुई। उसके साथ मौजूद दो युवक काले कपड़ों में थे और कथित तौर पर एनएसजी कमांडो जैसी छवि प्रस्तुत कर रहे थे। वहीं चालक के पास भारत सरकार का पहचान पत्र भी मिला है।
पुलिस और अन्य एजेंसियां इन सभी पहलुओं की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं।
NEET में असफलता के बाद मां से बोला था झूठ
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आर्यन वर्मा ने बताया कि उसका सपना सेना में डॉक्टर बनने का था। उसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET दी थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। वह अपनी दिल की मरीज मां को निराश नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने उन्हें बता दिया कि उसका चयन आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) में हो गया है।
बताया जाता है कि इसी झूठ को सच साबित करने के लिए उसने सेना की वर्दी और अन्य सामग्री जुटानी शुरू कर दी। उसने कथित तौर पर नोएडा और गुरुग्राम से वर्दी और अन्य सामान एकत्र किए और अपने पिता की गाड़ी पर भी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जैसी पहचान दर्शाने वाले प्रतीक लगवा लिए।
हालांकि, पुलिस उसके इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
21 साल की उम्र में 'ब्रिगेडियर' बनने की कहानी ने उठाए सवाल
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा आर्यन की उम्र को लेकर हो रही है। भारतीय सेना में ब्रिगेडियर का पद लंबे सैन्य अनुभव और वर्षों की सेवा के बाद मिलता है। ऐसे में महज 21 वर्ष की उम्र में किसी युवक का ब्रिगेडियर की वर्दी पहनकर घूमना लोगों के बीच चर्चा और हैरानी का विषय बना हुआ है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
सीओ सिटी पंकज पंत ने बताया कि आरोपी आर्यन वर्मा पुत्र अनिल वर्मा, निवासी दुर्गा एन्क्लेव, थाना रोजा से पूछताछ की जा रही है। उसके पास से एक नकली पिस्तौल और अन्य सामग्री बरामद हुई है। उसके साथ मौजूद दो सिक्योरिटी गार्ड और एक चालक से भी पूछताछ जारी है।
पुलिस के अनुसार, मामले में तहरीर प्राप्त हो चुकी है और मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक झूठ, जो बहुत दूर तक चला गया
फिलहाल मामले की जांच जारी है और कई सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। लेकिन इतना जरूर है कि NEET में असफलता के बाद अपनी मां को दिलासा देने के लिए बोले गए कथित एक झूठ ने ऐसी कहानी का रूप ले लिया, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। कल तक जो युवक खुद को ब्रिगेडियर बताकर लोगों के बीच सम्मान पा रहा था, आज वही पुलिस और जांच एजेंसियों के सवालों का सामना कर रहा है। अब इस कहानी का अगला अध्याय पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।