

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

rahul gandhi demands cec gyanesh kumar resignation election commission controversy
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया और उसके भीतर कथित मतभेदों को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर पूरे मामले में सरकारी गवाह बनना चाहिए।
राहुल गांधी ने 24 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग मतदाताओं के वोट का संरक्षक है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा
विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि उसके फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। इसलिए इन मीडिया रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों के बीच आयोग की आधिकारिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
गोवा में 97 मतदाताओं का मामला भी उठा
राहुल गांधी के हमले के बीच गोवा की मतदाता सूची से जुड़े एक मामले ने भी विवाद को और बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के दौरान 97 ऐसे मतदाताओं के मामले सामने आए जिन्हें स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद योग्य माना था, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं हो सके।
रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में पुराने फैसले को पलटकर नाम शामिल करने की जरूरत बताई गई थी, लेकिन केंद्रीकृत ECINet सिस्टम में उस फैसले को 'रोलबैक' करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कथित तौर पर 13 से 18 फरवरी के बीच दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को लगातार ईमेल भेजकर समाधान की मांग की।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सात दिनों में कुल 8 ईमेल भेजे गए। इनमें 97 मामलों में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने और योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल करने की मांग की गई थी। इसके बावजूद 21 फरवरी को जारी अंतिम सूची में इन 97 नामों के शामिल नहीं होने की बात सामने आई।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने इसी तरह के मामलों और चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को आधार बनाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से इस्तीफा देकर पूरे मामले की सच्चाई सामने लानी चाहिए।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जांच होनी चाहिए। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताया गया और कहा गया कि विपक्ष चुनाव आयोग तथा चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है।
संसद में महाभियोग की तैयारी का दावा
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी दल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी भी कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्षी सांसदों के स्तर पर इस संबंध में मसौदा तैयार किया जा रहा है। इससे पहले भी राज्यसभा और लोकसभा में CEC को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित नोटिस दिए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR के दौरान मतदाता सूची में बदलाव और ECINet जैसे केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गोवा के 97 मतदाताओं का मामला इस बहस का एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है।
फिलहाल विवाद के तीन प्रमुख केंद्र हैं—CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोप, चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मामलों की प्रक्रिया। आने वाले दिनों में संसद और चुनाव आयोग के स्तर पर इस मुद्दे पर और राजनीतिक तथा संस्थागत प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।