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सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में प्रधान आरक्षक की पत्नी और 12 वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी कुलदीप साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में डीएनए जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और 51 गवाहों की गवाही को अहम साक्ष्य माना। 288 पन्नों के फैसले में अदालत ने आरोपी और उसके साथियों के आचरण पर भी सख्त टिप्पणियां कीं। इस फैसले के बाद आरोपी को रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।
22 मामलों में बरी होने के बाद बढ़ा था दुस्साहस
अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कुलदीप साहू का पुराना कारोबार कबाड़ से जुड़ा था। उस पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे। बताया गया है कि वह 22 आपराधिक मामलों में बरी हो चुका था। इसके बाद उसका दुस्साहस बढ़ता गया और पुलिसकर्मियों के साथ उसका विवाद भी चर्चा में रहने लगा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच उसका खौफ बताया जाता था। वह कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को गाली देने और जान से मारने की धमकी देने से भी नहीं हिचकता था। इसी पृष्ठभूमि में अक्टूबर 2024 की घटना ने पूरे सूरजपुर को झकझोर दिया।
विवाद के बाद भाई की गिरफ्तारी से भड़का था आरोपी
बताया गया है कि 8 अक्टूबर 2024 को एक विवाद के बाद पुलिस ने कुलदीप साहू के भाई संदीप को गिरफ्तार किया था। इससे कुलदीप नाराज हो गया। आरोप है कि 13 अक्टूबर को बस स्टैंड के पास उसने पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर खोलता हुआ तेल फेंकने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने उसकी घेराबंदी की।
रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद कुलदीप बदले की भावना से प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा। वहां उसने प्रधान आरक्षक की पत्नी और 12 वर्षीय बेटी पर चाकू और कैंची से हमला कर उनकी हत्या कर दी। आरोप है कि उसने महिला के साथ दुष्कर्म भी किया और दोनों शवों को दूर ले जाकर फेंक दिया।
इस दोहरे हत्याकांड से जिले में आक्रोश फैल गया था। घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाने की कार्रवाई भी की गई थी। बाद में नए पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी।