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वॉशिंगटन। अमेरिका की सीनेट में एक द्विदलीय (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट) विधेयक पेश किया गया है, जिसमें भारत समेत रूस से सबसे अधिक तेल और गैस खरीदने वाले पांच देशों पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव बनाना बताया गया है।
प्रस्तावित बिल के अनुसार भारत और चीन के अलावा अन्य प्रमुख रूसी ऊर्जा आयातक देशों को भी इसके दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जिन देशों ने रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम की है, उनके लिए कुछ छूट का प्रावधान भी रखा गया है।
बिल के समर्थकों का कहना है कि टैरिफ को पहली बार भू-राजनीतिक दबाव के एक औजार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं पर अतिरिक्त प्रतिबंधों का भी प्रस्ताव है।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच भी मतभेद हैं। कुछ सांसदों का कहना है कि इससे राष्ट्रपति को व्यापार नीति में अत्यधिक अधिकार मिल सकते हैं और भारत जैसे सहयोगी देशों के साथ अमेरिका के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल यह केवल प्रस्तावित विधेयक है, इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की आगे की प्रक्रिया और मंजूरी से गुजरना होगा।