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13th death due to kidney disease in Mahasamund's Jhalkhamhariya; 4 acres of farmland sold for treatment.
महासमुंद। महासमुंद जिले के ग्राम झालखम्हरिया में किडनी बीमारी का संकट गंभीर होता जा रहा है। करीब सात महीने से बीमारी से जूझ रही बिराजो बाई ध्रुव की शनिवार को मौत हो गई। परिवार के अनुसार, उनके इलाज में 20 लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए और आर्थिक मजबूरी में परिवार को अपनी 4 एकड़ कृषि भूमि तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ग्रामीणों के मुताबिक, झालखम्हरिया में पिछले करीब 10 वर्षों के दौरान किडनी बीमारी से पहले ही 12 लोगों की मौत हो चुकी थी। बिराजो बाई की मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 13 हो गया है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में बीमारी को लेकर डर और चिंता बढ़ती जा रही है।
परिवार का आरोप है कि आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन समय पर कोई सहायता नहीं मिल सकी। इलाज का खर्च लगातार बढ़ने से परिवार पर आर्थिक संकट गहराता गया और बिराजो बाई की हालत भी बिगड़ती चली गई।
बिराजो बाई की मौत के बाद गांव में पीने के पानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांव के ट्यूबवेल, हैंडपंप और सिंटेक्स टैंक से पानी के 16 सैंपल लिए हैं। जांच में इनमें से 3 सैंपल में आयरन की मात्रा निर्धारित स्तर से दोगुनी से अधिक पाई गई है।
हालांकि, किडनी बीमारी और पानी की गुणवत्ता के बीच संबंध को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। ग्रामीणों की मांग है कि पानी की विस्तृत जांच के साथ बीमारी के कारणों की भी गंभीरता से जांच कराई जाए।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में घर-घर जाकर 554 लोगों की बीपी, शुगर, टीबी और कुष्ठ रोग की जांच की है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों में किडनी बीमारी से मौतें हुई हैं, उनके सदस्यों की अब तक ब्लड जांच नहीं की गई है। ग्रामीण किडनी प्रभावित परिवारों की नियमित जांच, बीमारी की स्क्रीनिंग और इलाज की बेहतर व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सुरेश कुमार, हेमंत कुमार ध्रुव, मनटोरा ध्रुव और बिराजो बाई ध्रुव का डायलिसिस चल रहा था। अब बिराजो बाई की मौत हो चुकी है। वहीं हेमंत कुमार रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। इसके अलावा गांव के 9 अन्य लोगों में किडनी से जुड़े लक्षण पाए गए हैं। इन्हें दवा देकर नियमित उपचार की सलाह दी गई है।
गांव में नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन पानी की टेस्टिंग के कारण अभी तक नियमित सप्लाई शुरू नहीं की गई है। फिलहाल पूरे गांव में आंगनबाड़ी के ट्यूबवेल से पानी पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नल-जल योजना की सप्लाई शुरू नहीं होती, तब तक पानी की गुणवत्ता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 41 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें 15 से अधिक बच्चे रोजाना पहुंचते हैं। ये बच्चे भी इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों की चिंता है कि गांव में किडनी बीमारी के मामले सामने आने के बावजूद अब तक इन बच्चों की स्वास्थ्य जांच नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि आंगनबाड़ी के बच्चों समेत पूरे गांव की व्यापक स्वास्थ्य जांच कराई जाए और किडनी बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जाए।
मामले को लेकर सीएमएचओ नागेश्वर राव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में ग्रामीणों की ओर से उठाए जा रहे सवालों और प्रशासनिक मदद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
लगातार हो रही मौतों और किडनी बीमारी के मामलों के बीच अब ग्रामीणों को बीमारी के वास्तविक कारणों की जांच, सुरक्षित पेयजल और प्रभावित परिवारों के लिए उचित उपचार एवं आर्थिक सहायता का इंतजार है।