

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार
.jpg&w=3840&q=75)
21 years of Black: The Sanjay Leela Bhansali film that changed the way Hindi cinema was conceived
Black movie 21 years: प्रसिद्ध फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली, जिनका नाम अक्सर राज कपूर और गुरु दत्त जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ लिया जाता है, ने अपने करियर में कई यादगार और ऐतिहासिक फिल्में दी हैं। इन्हीं फिल्मों में से एक है ब्लैक, जिसने न सिर्फ भंसाली के करियर को नई दिशा दी, बल्कि हिंदी सिनेमा की पारंपरिक कहानी कहने की शैली को भी चुनौती दी। इस फिल्म ने यह साबित किया कि भंसाली केवल भव्य सेट और शानदार दृश्य ही नहीं, बल्कि गहरी, संवेदनशील और भावनात्मक कहानियां भी उतनी ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
4 फरवरी 2005 को रिलीज़ हुई ब्लैक आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे अलग और प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती है। अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी ने इसमें अपने करियर की सबसे यादगार भूमिकाओं में से एक निभाई। फिल्म की कहानी, सादा लेकिन असरदार संगीत और मजबूत सिनेमैटोग्राफी ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से गहराई तक छुआ। रिलीज़ के 21 साल पूरे होने के बाद भी ब्लैक को एक मॉडर्न क्लासिक के रूप में देखा जाता है।
ब्लैक की कहानी मशहूर नेत्रहीन-बधिर सामाजिक कार्यकर्ता हेलेन केलर और उनकी शिक्षिका ऐन सुलिवन के जीवन से प्रेरित है। हालांकि भंसाली ने इस कहानी को भारतीय सामाजिक परिवेश में ढालते हुए इसे पूरी तरह देसी भावनाओं से जोड़ा। फिल्म में गुरु और शिष्य के रिश्ते को जिस संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया, वह हिंदी सिनेमा में बहुत कम देखने को मिला है।
इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी की जोड़ी को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। अमिताभ ने एक सख्त लेकिन भीतर से टूटे शिक्षक की भूमिका निभाई, जबकि रानी ने नेत्रहीन-बधिर लड़की मिशेल के संघर्ष और आत्मबल को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा। दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री आज भी हिंदी सिनेमा की बेहतरीन जोड़ियों में गिनी जाती है।
रानी मुखर्जी ने अपने किरदार को वास्तविकता के करीब लाने के लिए साइन लैंग्वेज सीखी और विशेष ट्रेनिंग ली। उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया कि यह रोल उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसी फिल्म ने उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में नई पहचान भी दी।
ब्लैक उन शुरुआती मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में शामिल रही, जिसमें पारंपरिक गाने और नाच नहीं थे। फिल्म में भावनाओं को व्यक्त करने के लिए केवल बैकग्राउंड म्यूज़िक का सहारा लिया गया, जिसने कहानी के असर को और गहरा बना दिया। यह उस दौर के हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा और साहसिक प्रयोग था।
फिल्म ने अवॉर्ड्स के मामले में भी इतिहास रचा। 51वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में ब्लैक को जिन 11 श्रेणियों में नामांकन मिला, उन सभी में इसने जीत हासिल की। यह उपलब्धि आज भी फिल्मफेयर के इतिहास में बेहद खास मानी जाती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी ब्लैक को बड़ी पहचान मिली। 53वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म को तीन प्रमुख सम्मान मिले, जिनमें सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का पुरस्कार और अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल है।
फिल्म की कहानी की सार्वभौमिक अपील का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2013 में इसका तुर्की रीमेक Benim Dünyam बनाया गया। यह साबित करता है कि ब्लैक की भावनात्मक गहराई ने सांस्कृतिक और भौगोलिक सीमाओं को पार किया।
सिनेमैटोग्राफी के स्तर पर भी ब्लैक बेहद खास रही। फिल्म में काले और सफेद रंगों का प्रतीकात्मक इस्तेमाल अंधकार, ज्ञान और आत्मिक जागरण को दर्शाता है। यही वजह है कि 21 साल बाद भी ब्लैक सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि संवेदनाओं और सिनेमा की ताकत का एक मजबूत उदाहरण मानी जाती है।


.jpeg)
.jpeg)