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Entertainment: Banijay Asia's 'The 50': A new powerhouse reality show of strategy, drama, and survival, bringing fans into the game.
मुंबई। रियलिटी शो की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुके बनिजय एशिया ने एक बार फिर गेम बदलने वाला कॉन्सेप्ट पेश किया है। जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रहा ‘द 50’ न सिर्फ़ भीड़ से अलग खड़ा है, बल्कि टीवी एंटरटेनमेंट को नए सिरे से परिभाषित करता नज़र आ रहा है। हाई-स्टेक स्ट्रैटेजी, अनप्रेडिक्टेबल ट्विस्ट और टीम-बेस्ड गेमप्ले के साथ यह शो हाल के वर्षों का सबसे इनोवेटिव नॉन-फिक्शन फॉर्मैट बनकर उभरा है।
एक सच्चा मास एंटरटेनर
‘द 50’ को मास एंटरटेनमेंट का परफेक्ट पैकेज कहा जा सकता है। इसमें देश के बड़े सेलेब्रिटी एंटरटेनर्स अपने फैन्स के लिए मैदान में उतरते हैं। एलायंस, गेम स्ट्रैटेजी और टीम स्पिरिट शो की रीढ़ हैं, जहां ताकत, लीडरशिप और स्किल्स के साथ सर्वाइवल स्ट्रैटेजी भी अहम भूमिका निभाती है। हाई-इंटेंसिटी ड्रामा और ग्रुप डायनेमिक्स इसे और दिलचस्प बनाते हैं।
सेलेब्रिटीज़ और गेम की असली स्पिरिट
अब तक जिन सेलेब्रिटीज़ को आक्रामक या टकराव वाले अवतार में देखा गया है, ‘द 50’ में वही एक नई साइड दिखाते नज़र आते हैं। यहां वे टीम के साथ मिलकर खेलते हैं, एक-दूसरे का सपोर्ट करते हैं और गेम को एन्जॉय करते हुए आगे बढ़ते हैं। यही शो की असली जान बनती है।
फैन्स भी बने गेम का हिस्सा
‘द 50’ का सबसे बड़ा यूएसपी यह है कि यहां सिर्फ कंटेस्टेंट ही नहीं, उनके फैन्स भी जीत का हिस्सा बनते हैं। इससे पावर केवल घर के अंदर सीमित नहीं रहती, बल्कि सीधे ऑडियंस तक पहुंचती है। यह शो दर्शकों की एंगेजमेंट को सिर्फ वोटिंग तक सीमित न रखकर उसे एक एक्टिव पार्टिसिपेशन में बदल देता है।
द लायन: रहस्यमयी ताकत की एंट्री
शो में ‘द लायन’ की मौजूदगी इसे और भी अनोखा बनाती है। बिना चेहरा, सिर्फ आवाज़ और पूरी पावर—ना कोई होस्ट, ना मेंटर। उसकी हर अनाउंसमेंट कंटेस्टेंट्स पर दबाव बढ़ाती है और गेम में अनिश्चितता का एलिमेंट जोड़ती है, जो शो को लगातार थ्रिलिंग बनाए रखता है।
ना पब्लिक वोटिंग, ना कम्फर्ट ज़ोन
‘द 50’ में पब्लिक वोटिंग का कोई सहारा नहीं है। यहां ना सेफ्टी नेट है और ना ही लंबे समय तक चलने वाले एलायंस। हर दिन सिर्फ सर्वाइवल का होता है, जहां कंटेस्टेंट्स को बार-बार अपने रिश्तों और रणनीतियों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
स्केल के साथ सब्स्टेंस
50 दिनों तक 50 सेलेब्रिटीज़ को एक साथ संभालना सिर्फ नंबर गेम नहीं है। इतने बड़े स्केल पर एलायंस बनते-टूटते हैं, पावर सेंटर्स उभरते हैं और टकराव तेज़ होते हैं। यही लेयर्ड स्ट्रक्चर शो को छोटे फॉर्मैट वाले रियलिटी शोज़ से अलग बनाता है।
स्ट्रैटेजी से निकला ड्रामा, बनावटी नहीं
‘द 50’ का ड्रामा स्क्रिप्टेड नहीं, बल्कि गेम से जन्मा हुआ है। हाई-स्टेक फैसले, सही-गलत के बीच की जद्दोजहद और बदलती वफादारियां खुद-ब-खुद टेंशन पैदा करती हैं, जिससे शो ज्यादा रियल और रिलेटेबल लगता है।