

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

A father risked his life to save his 3-year-old daughter from a leopard, and with the help of villagers, managed to get the animal trapped in a cage.
सीतानदी टाइगर रिजर्व से लगे वनांचल में चार दिनों से दहशत का पर्याय बना आदमखोर तेंदुआ शुक्रवार सुबह धमतरी जिले के आमानारा गांव में पकड़ा गया। सुबह करीब 7 बजे गांव में घुसे तेंदुए ने एक के बाद एक तीन ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल 42 वर्षीय प्रभुराम की अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही मौत हो गई।
इसके बाद तेंदुए ने घर के बाहर खेल रही 3 वर्षीय बालिका सुहानी मरकाम पर झपट्टा मारा। मासूम की चीख सुनकर 30 वर्षीय पिता सुरेश मरकाम बिना किसी हथियार के सीधे खूंखार तेंदुए से भिड़ गए। उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए तेंदुए को दबोच लिया। चीख-पुकार सुनकर लाठी-बल्लियां लेकर दौड़े ग्रामीणों ने तेंदुए को जमीन पर पटक दिया। करीब 20 मिनट तक उसे दबाए रखा। फिर वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पिंजरे में कैद किया।
तेंदुए का डटकर सामना करने वाले बच्ची के पिता सुरेश मरकाम ने बताया, कि सुबह 7 बजे का वक्त था। मैं घर की चौखट पर बैठा था। मेरी 3 साल की बेटी सुहानी मरकाम घर के सामने खेल रही थी। अचानक एक तेंदुआ बस्ती में आया। वह दौड़ते हुए प्रभुराम नेताम पर टूट पड़ा। डर के मारे तुरंत मैं घर के अंदर भागा। तेंदुआ भी अंदर आ गया। उसने मुझ पर झपट्टा मारा। फिर वह बाहर निकला। उसने बीरबल नेताम पर हमला कर दिया। मैंने डंडा लेकर उसे बचाने की कोशिश की। उसके बाद वह मेरी बेटी सुहानी पर टूट पड़ा। बेटी को बचाने मैं भागा। तभी तेंदुए ने एक बार फिर मुझपर हमला किया। बेटी की रक्षा करते हुए मैंने तेंदुए से संघर्ष किया। मैंने उसे पूरी ताकत से दोनों हाथों से उसे जकड़े रखा। फिर गांव के युवा मदद के लिए आए। उन्होंने लकड़ियों को तेंदुए के गले, पीठ और पैरों के चारों ओर मजबूती से टिकाया। लगभग 20 मिनट बाद वन विभाग की टीम पहुंची और फिर टीम ने तेंदुए को अपने कब्जे में ले लिया।