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A new chapter in Spain's footballing supremacy: 'La Roja' has set a record never achieved before.
मैड्रिड/न्यू जर्सी। स्पेन ने फुटबॉल की दुनिया में अपना दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया है। न्यू जर्सी में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ स्पेन ऐसा पहला देश बन गया है, जिसके पास एक ही समय में पुरुष और महिला दोनों वर्गों के विश्व खिताब मौजूद हैं। स्पेन की महिला टीम ने 2023 में सिडनी में खेले गए महिला वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड को हराकर इतिहास रचा था। अब पुरुष टीम की सफलता ने स्पेन को फुटबॉल इतिहास में अलग पहचान दिला दी है।
स्पेन की सफलता केवल वर्ल्ड कप जीत तक सीमित नहीं है। पिछले पांच वर्षों में स्पेन ने जूनियर से लेकर सीनियर स्तर तक कुल 16 विश्व और यूरोपीय खिताब जीतकर अपनी मजबूत फुटबॉल व्यवस्था का प्रदर्शन किया है।महिला फुटबॉल में 2022 से 2026 के बीच स्पेन ने 11 खिताब अपने नाम किए हैं। इनमें सीनियर वर्ल्ड कप 2023, नेशंस लीग 2024 और 2025, अंडर-20 वर्ल्ड कप 2022, अंडर-19 यूरोपियन चैंपियनशिप और अंडर-17 स्तर के कई खिताब शामिल हैं।वहीं, पुरुष फुटबॉल में इसी अवधि के दौरान स्पेन ने पांच बड़ी ट्रॉफियां जीती हैं। इनमें वर्ल्ड कप 2026, यूरोपियन चैंपियनशिप 2024, नेशंस लीग 2023, ओलंपिक गोल्ड मेडल 2024 और अंडर-19 यूरोपियन खिताब शामिल हैं।
स्पेन ने फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर के बाद हराया। मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में हुआ, जहां सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में शानदार गोल कर स्पेन को बढ़त दिलाई।दिलचस्प बात यह है कि 2010 में दक्षिण अफ्रीका में अपना पहला वर्ल्ड कप जीतने वाली स्पेन की टीम ने उस मुकाबले में भी एक्स्ट्रा टाइम में ही खिताब हासिल किया था। न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में मिली जीत ने उस याद को फिर ताजा कर दिया।
फाइनल में अर्जेंटीना के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी अपनी पहचान के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ सके। स्पेन की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा मेसी को नियंत्रित करना था और टीम इसमें पूरी तरह सफल रही।स्पेन के डिफेंडर्स और मिडफील्डर्स ने मेसी को लगातार घेरकर उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्हें अपनी सामान्य स्थिति से काफी पीछे आना पड़ा, जिससे अर्जेंटीना की आक्रमण क्षमता कमजोर हो गई।स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और आक्रामक प्रेसिंग के जरिए अर्जेंटीना की मिडफील्ड को दबाव में रखा। मेसी तक गेंद पहुंचाने वाली सप्लाई लाइन को रोकने में स्पेन कामयाब रहा।
स्पेन के कोच लुइस डी ला फुएंते ने भी इस जीत के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। 65 साल 29 दिन की उम्र में वह वर्ल्ड कप खिताब जीतने वाले सबसे उम्रदराज कोच बन गए।वहीं, 19 वर्षीय लामिने यमाल ने भी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। वह यूरो कप और वर्ल्ड कप दोनों प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले पहले किशोर खिलाड़ी बन गए हैं।
स्पेन की मौजूदा सफलता अचानक नहीं आई है। देश ने जमीनी स्तर से लेकर सीनियर टीम तक खिलाड़ियों को तैयार करने की मजबूत व्यवस्था बनाई है। यही वजह है कि पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्पेन लगातार विश्व मंच पर अपना प्रभाव दिखा रहा है।'ला रोजा' अब केवल एक टीम नहीं, बल्कि आधुनिक फुटबॉल की सबसे सफल प्रणालियों में से एक बन चुकी है।