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Scope of Gulf conflict widens; crisis deepens in the region following attacks by the US and Iran.
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। छठी रात भी अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और इराक के कुछ हिस्सों की ओर मिसाइलें दागीं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
अमेरिकी हमलों में होर्मोजगान प्रांत के कई पुल, बिजली ढांचा और चाबहार बंदरगाह का एक सर्विलांस टावर क्षतिग्रस्त हो गया। ईरानी मीडिया के मुताबिक यह टावर समुद्री व्यावसायिक गतिविधियों की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता था।चाबहार बंदरगाह रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके विकास में भारत की भी अहम भागीदारी रही है।इसके अलावा अमेरिका ने बंदर अब्बास को मध्य ईरान और तेहरान से जोड़ने वाले प्रमुख सड़क और रेल संपर्क को बाधित करने के उद्देश्य से बंदर खमीर क्षेत्र के पुलों पर भी हमला किया।
ईरान के ऊर्जा मंत्रालय ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिकी हमलों से देश के बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद सरकार ने दक्षिणी प्रांतों के नागरिकों से बिजली की बचत करने की अपील की है, ताकि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने कई देशों को निशाना बनाया। युद्धविराम की कोशिशों में शामिल कतर पर मिसाइल हमला किया गया।कुवैत में बिजली उत्पादन और समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र पर भी हमला हुआ। बताया जा रहा है कि कुवैत की लगभग 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति इसी व्यवस्था पर निर्भर करती है।उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में भी हमले हुए, जहां ईरानी कुर्द विद्रोही संगठन कोमाला को निशाना बनाया गया। इन हमलों में कम से कम नौ लोगों की मौत की खबर है।इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर भी हमला हुआ, हालांकि जहाज को केवल मामूली नुकसान पहुंचा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष में अमेरिका निर्णायक बढ़त हासिल कर रहा है और इसके परिणाम जल्द सामने आएंगे।विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका होर्मुज क्षेत्र में ईरान की रणनीतिक पकड़ कमजोर करने के लिए उसके परिवहन और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाकर युद्ध का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।यदि यही स्थिति बनी रही तो खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत और कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।