

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Adopt medicinal farming instead of paddy, farmers' income will increase: Anjay Shukla
रायपुर। छत्तीसगढ़ को विश्व की हर्बल राजधानी बनाने की दिशा में राज्य लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य के तहत सोमवार 25 मई 2026 को राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर परिसर में “धान की खेती के बदले औषधि पौधों की खेती” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने की।

कार्यशाला की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद धरसीवा ब्लॉक के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती से होने वाले लाभों की जानकारी दी गई।
अंजय शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान लंबे समय से पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर हैं, जिसमें लागत अधिक और लाभ कम होता है। ऐसे में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है, क्योंकि इसमें लागत और मेहनत कम लगती है, जबकि मुनाफा अधिक मिलता है।

उन्होंने बताया कि बोर्ड किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए निशुल्क पौधे उपलब्ध करा रहा है। साथ ही प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण और उपज की खरीदी के लिए संस्थाओं से अनुबंध जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, ताकि किसानों को बाजार की चिंता न करनी पड़े।
कार्यशाला में औषधीय खेती के सलाहकार डी.के.एस. चौहान (सेवानिवृत्त वनमंडलाधिकारी) ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से किसानों को ब्राह्मी, वच, लेमनग्रास, खस और सिट्रोनेला जैसी फसलों की खेती की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कम पानी वाले क्षेत्रों में सुगंधित पौधों की खेती के तरीके भी विस्तार से समझाए और किसानों के सवालों के जवाब दिए।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को सिंदूरी के पौधों का वितरण भी किया गया। अंजय शुक्ला ने कहा कि बोर्ड किसानों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है और औषधीय खेती के जरिए किसानों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लाने के लिए लगातार काम करता रहेगा।
कार्यशाला में डी.के.एस. चौहान, प्रगति पटेल, दिनेश खूंटे, राकेश यादव, तेजराम पटेल, रुक्मणि शिवारे समेत धरसीवा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और किसान मौजूद रहे।