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After 22 years, Madhumita murder case convict gets relief, Supreme Court says,
नई दिल्ली। देश के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय से पहले रिहाई की मांग को मंजूरी दे दी है। अदालत ने कहा कि किसी अपराध की गंभीरता या भयावहता को ही सजा में छूट न देने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने गृह मंत्रालय के 9 जुलाई 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तराखंड सरकार की सिफारिश के बावजूद रोहित चतुर्वेदी की समयपूर्व रिहाई का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था।
कोर्ट बोला- राज्य का उद्देश्य सुधार होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दंड व्यवस्था का उद्देश्य केवल बदला लेना नहीं, बल्कि सुधार की संभावना को भी महत्व देना है।बेंच ने कहा कि रिमिशन यानी सजा में छूट, सजा देने की प्रक्रिया का विस्तार नहीं है। इसमें कैदी के वर्तमान व्यवहार, सुधार के संकेत और समाज में दोबारा शामिल होने की क्षमता को देखा जाता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल अपराध की प्रकृति के आधार पर राहत से इनकार करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को उसके जीवन के सबसे बुरे अपराध की छाया में हमेशा के लिए जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
रोहित चतुर्वेदी को सरेंडर करने की जरूरत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहित चतुर्वेदी पहले से जमानत पर बाहर हैं, इसलिए उन्हें दोबारा सरेंडर करने की आवश्यकता नहीं होगी।यह फैसला सामने आने के बाद एक बार फिर देश का चर्चित मधुमिता हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है।
क्या था मधुमिता शुक्ला हत्याकांड?
26 वर्षीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 9 मई 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।हत्या के समय वह गर्भवती थीं। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।मामले में उत्तराखंड की ट्रायल कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और सहयोगी संतोष कुमार राय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
उन्नाव दुष्कर्म मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत पर भी सख्त रुख अपनाया।अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।साथ ही हाई कोर्ट को निर्देश दिया गया कि सेंगर की याचिका पर नए सिरे से सुनवाई की जाए और मुख्य अपील पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास किया जाए।
शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद पर भी सुप्रीम कोर्ट नाराज
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद मामले में नेताओं द्वारा दिए जा रहे सार्वजनिक बयानों पर भी नाराजगी जताई।दालत ने कहा कि मीडिया में यह कहना कि सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं कर रहा या सुनवाई नहीं कर रहा, गैरजिम्मेदाराना है।कोर्ट ने नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर शब्दों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए।