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Air travel to become costlier due to ATF crisis; fares could rise by up to 25% in 2026.
मुंबई। भू-राजनीतिक तनाव, रिफाइनरियों में उत्पादन कटौती और विमान ईंधन (एटीएफ) की वैश्विक आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण आने वाले समय में हवाई यात्रा महंगी हो सकती है। वैश्विक सलाहकार कंपनी मैकिंजी ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 में हवाई किरायों में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
मैकिंजी की रिपोर्ट के अनुसार, विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी केवल कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि सबसे बड़ी समस्या एटीएफ की सीमित उपलब्धता है। खाड़ी क्षेत्र और एशिया के प्रमुख निर्यातक देशों ने उत्पादन में कटौती की है। ये देश वैश्विक विमान ईंधन आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन, भारत और दक्षिण कोरिया ने भी विमान ईंधन के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं, गर्मियों के ट्रैवल सीजन से पहले मांग बढ़ने और भंडार घटने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल और एटीएफ की कीमतों के बीच का अंतर, जिसे क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, 50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकता है। सामान्य परिस्थितियों में यह अंतर लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है। इससे एयरलाइंस की लागत में भारी वृद्धि होगी।
- ब्रेंट क्रूड चार माह के निचले स्तर पर
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 प्रतिशत गिरकर 75.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के कारण कच्चे तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई है।
- युद्धकालीन स्तर से 37% नीचे आया क्रूड
ईरान युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा स्तर उससे लगभग 37 प्रतिशत कम है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन में संभावित कटौती के कारण मांग मजबूत बनी रह सकती है।
- टिकट कीमत का 30% हिस्सा ईंधन लागत
एयरलाइन टिकट की कुल कीमत में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा ईंधन लागत का होता है। ऐसे में एटीएफ की कीमतों में तेज वृद्धि सीधे तौर पर टिकट दरों को प्रभावित करती है।
- ईंधन महंगा होने पर बढ़ता है किराया
विशेषज्ञों के अनुसार यदि एटीएफ की लागत दोगुनी हो जाती है, तो एयरलाइंस आमतौर पर 20 से 25 प्रतिशत तक किराया बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ यात्रियों पर डालती हैं।
1. टैंकर ट्रैफिक सामान्य होने से कुछ राहत संभव
होर्मुज जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य होने पर ईंधन कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।
2. रणनीतिक भंडारण से बनी रहेगी ऊंची कीमतें
कई देश भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए अपने रणनीतिक तेल भंडार भर रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
3. रिफाइनरियों की क्षमता पहले से चरम पर
दुनिया की अधिकांश रिफाइनरियां पहले ही उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। ऐसे में अतिरिक्त उत्पादन की गुंजाइश सीमित होने से आपूर्ति संकट जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा।