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History of the Emergency to be taught from Class 9; given prominent space in new NCERT book.
नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित और विवादास्पद दौर ‘आपातकाल’ को अब स्कूली शिक्षा में पहले से अधिक महत्व दिया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को प्रमुखता से शामिल किया है। अब तक यह विषय मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा के राजनीतिक विज्ञान पाठ्यक्रम का हिस्सा था।
एनसीईआरटी की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियांड’ में लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियों पर आधारित अध्याय के अंतर्गत आपातकाल का विस्तृत उल्लेख किया गया है। पुस्तक के पृष्ठ 155 पर इस विषय को शामिल करते हुए छात्रों को उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से अवगत कराया जाएगा।
पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के दौरान चलाए गए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र किया गया है। छात्रों को बताया जाएगा कि किस प्रकार उस समय विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग उठाई थी।
नई किताब में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया की क्या जिम्मेदारियां होती हैं तथा संकट के समय उसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एनसीईआरटी के अनुसार नई पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास, उसके उतार-चढ़ाव और संवैधानिक मूल्यों की बेहतर समझ प्रदान करना है।
गौरतलब है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। यह अवधि लगभग 21 महीने तक चली और मार्च 1977 में समाप्त हुई। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है, जिसकी चर्चा आज भी राजनीतिक और शैक्षणिक विमर्श में होती है।