

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Alert in Bastar over Cyclone ‘Arnab’; heavy rain and lightning expected... 5 passenger trains affected
जगदलपुर/रायपुर। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान अर्णब के संभावित असर को देखते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मौसम विभाग ने 27 से 30 अक्टूबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में खराब मौसम की चेतावनी दी है। बस्तर में मंगलवार और बुधवार को तेज बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका है। संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे ने भी सुरक्षा के मद्देनजर पांच यात्री ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार, मंगलवार शाम या रात से बारिश शुरू हो सकती है। तूफान के आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और बापटला के बीच तट से टकराने पर बारिश की तीव्रता बढ़ने की आशंका है। बस्तर में हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इससे खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने का खतरा है।
मौसम में बदलाव के बीच किसानों को खेतों में कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और जलभराव से बचाव के उपाय करने की सलाह दी गई है। सोमवार शाम से बुधवार तक गरज-चमक, अंधड़ और वज्रपात की आशंका जताई गई है।प्रशासन ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों में संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
चक्रवात के कारण भारी बारिश और अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए ओडिशा ने छत्तीसगढ़ के अनुरोध पर खातीगुड़ा बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। रविवार सुबह जलाशय के दो स्पिलवे गेट 0.6 मीटर तक खोले गए। इसका उद्देश्य जलाशय में अतिरिक्त पानी के लिए जगह बनाना और निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा कम करना है।पिछले महीने 23 से 26 सितंबर के बीच हुई भारी बारिश के दौरान बांध से करीब 10 टीएमसी पानी छोड़ा गया था। उस समय इंद्रावती नदी का जलस्तर 12.390 मीटर तक पहुंच गया था, जिसे 53 वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया। इससे जगदलपुर के नदी किनारे बसे क्षेत्रों सहित शहर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ था।अपर इंद्रावती परियोजना के अधिकारियों के अनुसार, रविवार सुबह जलाशय का स्तर 639.910 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण जलाशय क्षमता का स्तर 642 मीटर है। उस समय जलभराव 82.39 प्रतिशत था। बांध में 116.26 क्यूमेक पानी पहुंच रहा था, जबकि 341.27 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा था।
खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बीच सोमवार को इंद्रावती नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा। शाम चार बजे पुराने पुल के पास नदी का स्तर 3.210 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग नदी की स्थिति पर नजर रख रहा है।फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाढ़ का खतरा कम बताया गया है। हालांकि, संभावित बारिश और बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।इंद्रावती परियोजना के अधीक्षण यंत्री वेदप्रकाश पांडे के अनुसार, तूफान से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर ओडिशा के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। पिछले चार दिनों में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच तीन बार आधिकारिक चर्चा हुई है। जल संसाधन विभाग स्थिति की जानकारी साझा कर रहा है।
तूफान की आशंका के बीच रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस्तर क्षेत्र की पांच ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। कुछ ट्रेनों को निर्धारित अवधि के लिए रद किया गया है, जबकि हीराखंड एक्सप्रेस को जगदलपुर के बजाय रायगड़ा तक चलाने का फैसला लिया गया है।
ट्रेनों की स्थिति इस प्रकार है:विशाखापत्तनम-किरंदुल नाइट एक्सप्रेस: 29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक रद।विशाखापत्तनम-जगदलपुर पैसेंजर: 27 से 30 अक्टूबर तक रद।भुवनेश्वर-जगदलपुर हीराखंड एक्सप्रेस: 27 से 30 अक्टूबर तक रायगड़ा तक ही चलेगी।राउरकेला-जगदलपुर इंटरसिटी: 29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक रद।हावड़ा-जगदलपुर समलेश्वरी एक्सप्रेस: 27 से 30 अक्टूबर तक रद।इससे पहले सितंबर के अंतिम सप्ताह में केके रेललाइन के कोरापुट रेलखंड को नुकसान पहुंचने के कारण 25 सितंबर से जगदलपुर और कोरापुट के बीच यात्री सेवाएं बंद थीं। रेललाइन की मरम्मत के बाद 29 और 30 अक्टूबर से ट्रेनों के जगदलपुर तक फिर चलने की उम्मीद थी, लेकिन अब चक्रवात की आशंका से परिचालन प्रभावित हो रहा है। यात्रियों को सफर से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी जाती है।
चक्रवात को लेकर केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक कर विभिन्न राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की। कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने नई दिल्ली से राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की। छत्तीसगढ़ की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने राज्य में किए जा रहे इंतजामों की जानकारी दी।राज्य सरकार के अनुसार, आपात स्थिति से निपटने के लिए सात राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) टीमें जरूरी उपकरणों के साथ तैयार हैं। होमगार्ड और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
दक्षिण बस्तर में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित प्रभावित इलाकों में राहत शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं, खाद्य सामग्री, परिवहन और संचार व्यवस्था से जुड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी रहेगी।बैठक में कैबिनेट सचिव ने चक्रवात के दौरान जनहानि रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र के एशिया एवं प्रशांत क्षेत्रीय आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के संयुक्त पैनल के तहत तय सूची से दिए जाते हैं।अप्रैल 2020 में जारी सूची में 13 देशों के 13-13 नाम शामिल किए गए थे। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं। इस तरह सूची में कुल 169 नाम हैं।उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नाम भारत मौसम विज्ञान विभाग आवंटित करता है। जब किसी चक्रवात की अधिकतम निरंतर हवा की गति 34 नॉट यानी करीब 62 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक हो जाती है, तब उसे नाम दिया जाता है।‘अर्णब’ नाम बांग्लादेश की ओर से प्रस्तावित है। बंगाली भाषा में इसका अर्थ समुद्र या सागर होता है। उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की मौजूदा व्यवस्था सितंबर 2004 से लागू है।
चक्रवात अर्णब के संभावित प्रभाव को देखते हुए बस्तर में मौसम, नदी के जलस्तर और रेल परिचालन पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारी बारिश की आशंका के बीच प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, समय पर चेतावनी और जरूरत पड़ने पर राहत पहुंचाना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 27 से 30 अक्टूबर के बीच लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।