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Chhattisgarh: 'Chhattisgarh Herbals' launches Diwali gift packs; local products to gain access to a larger market
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्थानीय और हर्बल उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने तथा महिला स्व-सहायता समूहों और वन उपज संग्राहकों की आजीविका मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार इन गिफ्ट पैक के जरिए प्रदेश की वन संपदा और पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान देने की पहल की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। सरकार का प्रयास है कि वनों से प्राप्त उपज का अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो, ताकि इसका सीधा आर्थिक लाभ वन उपज संग्राहकों और महिला समूहों को मिल सके।
उन्होंने कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से माताएं-बहनें स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण कर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव के जरिए उनके परिश्रम को नई पहचान देने के साथ आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक इसी दिशा में सार्थक पहल हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बने उत्पादों को खरीदने और उपहार में देने से इसका लाभ सीधे वनांचल के परिवारों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंचता है। स्थानीय उत्पादों को अपनाना प्रदेश की परंपराओं, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागिता है।
‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के गिफ्ट पैक दो श्रेणियों प्रीमियम और सामान्य में तैयार किए गए हैं। प्रीमियम पैक में नौ प्रकार के चयनित उत्पाद शामिल हैं, जबकि सामान्य पैक में पांच प्रकार के उत्पाद रखे गए हैं। आम नागरिक इन गिफ्ट पैक को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे।
दिवाली गिफ्ट पैक में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और स्थानीय स्वाद से जुड़े कई उत्पाद शामिल किए गए हैं। इनमें जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो और महुआ से बने कुकीज़, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी और एलोवेरा जेल प्रमुख हैं।
इन उत्पादों के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक खाद्य संस्कृति, वन संपदा और महिला समूहों के उद्यम कौशल को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। स्थानीय वनोपज से तैयार उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और विपणन से ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद प्रदेश के विभिन्न वन धन विकास केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इनमें राजनांदगांव के कौरीनभाटा, कवर्धा के बोड़ला, जशपुर के पंचक्की, जगदलपुर के आसना, धमतरी के दुगली, कटघोरा के डोंगानाला तथा दुर्ग जिले के जामगांव (एम) स्थित केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई शामिल हैं।
इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपये बताया गया है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। महिला स्व-सहायता समूह उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और अन्य गतिविधियों में भागीदारी कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वन धन उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण और विपणन से वन उपज संग्राहकों तथा महिला स्व-सहायता समूहों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। दिवाली गिफ्ट पैक के जरिए इन उत्पादों की मांग और बिक्री बढ़ने से वनांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला समूहों के आर्थिक सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।